नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी स्कूल में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ हुए बलात्कार के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारद्वाज का दावा है कि आरोपी और स्कूल प्रबंधन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते जांच को प्रभावित किया जा रहा है।
बच्ची की हालत नाजुक, अस्पताल में भर्ती
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पीड़ित बच्ची की स्थिति पिछले 14 दिनों से अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
गंभीर इंफेक्शन: मासूम को 'सीवियर इंफेक्शन' के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह खाना-पीना नहीं कर पा रही है और उसे यूरिन पास करने तक में असहनीय तकलीफ हो रही है।
मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल: आप नेता ने आरोप लगाया कि मेडिकल करने वाली डॉक्टर ने शुरुआत में मां को बच्ची की अंदरूनी चोटों के बारे में विस्तार से बताया था, लेकिन बाद में आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट में उन तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया।
"मंत्री के करीबी हैं स्कूल मैनेजर" – पॉलिटिकल कनेक्शन का दावा
भारद्वाज ने इस मामले में मनजिंदर सिंह सिरसा और आशीष सूद का नाम लेते हुए सीधे तौर पर सरकार को घेरा।
मैनेजर की थाने में मौजूदगी: पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब भी वे थाने जाते थे, स्कूल मैनेजर मनजीत सिंह ओलख वहां पहले से मौजूद होते थे और पुलिस से बात करते थे।
सिरसा से संबंध: भारद्वाज ने दावा किया कि मनजीत सिंह ओलख दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के करीबी हैं, और इसी पहुंच के कारण पुलिस और प्रशासन उन पर नरम रुख अपना रहे हैं।
गायब हुई फाइल: भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि आखिर उस स्कूल की फाइल विभाग से क्यों गायब कर दी गई? सरकार क्या छिपाना चाहती है?
अदालत से मिली बेल पर जताई हैरानी
सौरभ भारद्वाज ने इस बात पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया कि इतने संवेदनशील मामले में, जहाँ बच्ची अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है, अदालत ने आरोपी को कुछ दिन पहले ही जमानत (बेल) दे दी है। उन्होंने कहा कि यह न्याय प्रणाली और पुलिस की ढीली पैरवी पर बड़े सवाल खड़ा करता है।
"सिस्टम की विफलता"
आप नेता ने कहा कि देश की राजधानी में एक मासूम बच्ची, जो शिक्षा के मंदिर (स्कूल) में गई थी, उसके साथ इस तरह की हैवानियत होना शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि रसूखदारों को बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
निष्कर्ष: इस मामले ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सौरभ भारद्वाज के इन गंभीर आरोपों के बाद अब गेंद सरकार और पुलिस के पाले में है कि वे इस पर क्या सफाई देते हैं और पीड़ित मासूम को न्याय कैसे मिलता है।





