कोलकाता |

पिछले कुछ महीनों से लगातार सियासी झटकों और अंदरूनी कलह से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए आखिरकार एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। पार्टी के भीतर 'अभिषेक बनर्जी बनाम अन्य वरिष्ठ नेता' की जंग में सबसे मुखर और बागी रुख अपना चुके दिग्गज सांसद कल्याण बनर्जी ने अचानक अपने तेवर नरम कर लिए हैं। कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के साथ सुलह का साफ संकेत दिया है, जिससे टीएमसी पर मंडरा रहा एक बड़ा राजनीतिक संकट फिलहाल टल गया है।

"अभिषेक को बचपन से बढ़ते देखा है..."— कल्याण बनर्जी

जो कल्याण बनर्जी कुछ दिनों पहले तक अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को पार्टी के लिए खतरा बता रहे थे, उनके सुर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताते हुए कहा:

"मैंने अभिषेक को बचपन से बढ़ते देखा है। उन्होंने खुद मुझसे कहा है कि मैं उनसे कोई भी बात सीधे कह सकता हूँ, इसलिए अब सब ठीक है। अब हमारा एकमात्र लक्ष्य एनडीए (NDA) के खिलाफ मजबूती से लड़ना है।"

राजनीतिक गलियारों में कल्याण बनर्जी के इस यू-टर्न को ममता बनर्जी के संकटमोचक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह साफ हो गया है कि अंदरूनी कलह के बावजूद ममता बनर्जी ही अभी भी पार्टी की सबसे बड़ी और निर्विवाद धुरी हैं।

सुलह के बीच 'बागियों' पर बरसे कल्याण: काकोली गुट को बताया 'अवसरवादी'

अभिषेक बनर्जी के साथ भले ही कल्याण बनर्जी ने कड़वाहट भुला दी हो, लेकिन उन्होंने पार्टी के उन बागी सांसदों को आड़े हाथों लिया जो अलग गुट बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले गुट पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'अवसरवादी' करार दिया।

कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पूछा:

"क्या ये बागी नेता कभी अपने निर्वाचन क्षेत्र में जनता के बीच जाते भी हैं?"

"काकोली घोष दस्तीदार खुद अपने क्षेत्र से गायब रहती हैं, तो वे किस आधार पर सवाल उठा रही हैं?"

उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी अब केवल उन्हीं वफादार नेताओं के साथ आगे बढ़ेगी जो जमीन पर जुड़े हैं, न कि अवसरवादियों के भरोसे।

ममता बनर्जी के लिए संजीवनी साबित होगा यह कदम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से जिस तरह टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी से पार्टी कमजोर हो रही थी, उससे विपक्षी खेमे (विशेषकर भाजपा) को बड़ा मौका मिल रहा था। यहाँ तक कि करीब 20 सांसदों के एनडीए में शामिल होने की अफवाहें भी बाजार में गर्म थीं।

ऐसे नाजुक मोड़ पर कल्याण बनर्जी का अभिषेक के साथ खड़े होना और ममता बनर्जी के प्रति वफादारी जताना टीएमसी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस एकजुटता ने न केवल पार्टी टूटने की अटकलों पर विराम लगा दिया है, बल्कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए तृणमूल कांग्रेस के कैडर में एक नया जोश भर दिया है।