नई दिल्ली: संसद के निचले सदन में लंबी चर्चा, जोरदार नोकझोंक और हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक के पारित होने की घोषणा करते हुए सदन की कार्यवाही को 30 जुलाई, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिली।
विपक्ष रचनात्मक सुझाव देने के बजाय राजनीति कर रहा है: जितेंद्र सिंह
विधेयक को पटल पर रखते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील और अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक पर ठोस सुझाव देने के बजाय विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है।
सदन में नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा:
"विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। देश के होनहार युवाओं को 'मूर्ख' कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा लगता है कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं का न्यूनतम ज्ञान भी नहीं है। उन्होंने जिस प्रकार की असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है, उसे दोहराना भी अनुचित होगा।"
केंद्रीय मंत्री ने हालिया घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कटाक्ष किया कि सत्ता पाने की हताशा में विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर जा बैठे थे, जहाँ उन्हें प्रशासनिक मर्यादा का ध्यान दिलाना पड़ा।
गोलियाँ चलाने का आरोप निराधार, आदेश मजिस्ट्रेट का क्षेत्र: सरकार
सदन में सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठे सवालों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी, केवल स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में गोली चलाने या बल प्रयोग के आदेश देने का अधिकार किसी मंत्री के पास नहीं, बल्कि संबंधित मजिस्ट्रेट के पास होता है।
मुझे संसद में बोलने से रोका गया, छात्रों पर हुई बर्बरता: राहुल गांधी
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्हें संसद में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्रियों से बार-बार आग्रह किया, लेकिन उनकी आवाज़ दबा दी गई।
संवाददाताओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा:
"दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरता की गई। छात्रों पर साधारण लाठियों के अलावा शॉक बैटन, कील लगी लाठियों और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। एम्स (AIIMS) के मेडिकल सर्टिफिकेट से साफ है कि एक छात्र को पैलेट गन लगी है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी जाने का गंभीर खतरा है।"
राहुल गांधी ने आगे कहा कि पुलिस सीधे गृह मंत्री अमित शाह के अधीन आती है और छात्रों पर हुई इस हिंसा के लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे छात्रों के अधिकार और जनहित के मुद्दे उठाने के लिए किसी भी दबाव में भाजपा या आरएसएस से माफी नहीं मांगेंगे।





