दूधनोई (असम): असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ और समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर बड़ा बयान देकर चुनावी पारा गरमा दिया है। गोलपाड़ा जिले के दूधनोई में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि UCC के लागू होने से घुसपैठियों के उन मंसूबों पर पानी फिर जाएगा, जिसके तहत वे बहु-विवाह के जरिए अपनी जड़ें जमाते हैं।

घुसपैठियों पर प्रहार और शांति का वादा

अमित शाह ने घुसपैठ के गंभीर प्रभावों पर जोर देते हुए कहा कि मेघालय के गारो हिल्स जैसे क्षेत्रों में घुसपैठियों ने स्थानीय आदिवासी महिलाओं से विवाह कर सत्ता और संसाधनों पर कब्जा करने का प्रयास किया है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया:

"अगर भाजपा को फिर से मौका मिला, तो राज्य से घुसपैठ को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा और अवैध रूप से रह रहे लोगों को वापस भेजा जाएगा।"

आदिवासी गौरव और UCC पर स्पष्टीकरण

गृह मंत्री ने जनजातीय समाज की चिंताओं को दूर करते हुए साफ किया कि UCC के दायरे से आदिवासी क्षेत्रों को बाहर रखा जाएगा, ताकि उनकी समृद्ध परंपराओं और संस्कृति पर कोई आंच न आए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:

ऐतिहासिक कदम: प्रधानमंत्री मोदी ने द्रौपदी मुर्मू के रूप में देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति दी है।

विकास का रोडमैप: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मिलकर आदिवासियों के उत्थान के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।

विकास बनाम अस्थिरता

शाह ने दावा किया कि भाजपा के शासन में असम में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है। उन्होंने मतदाताओं को सचेत करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस फिर से मजबूत होती है, तो राज्य में पुरानी अस्थिरता लौट सकती है। उन्होंने शांति और निरंतर विकास के लिए कमल के निशान पर वोट देने की अपील की।

महत्वपूर्ण चुनावी जानकारी

विवरणतिथि
मतदान की तारीख9 अप्रैल
परिणाम/मतगणना4 मई
मुख्य मुद्दाघुसपैठ, UCC और शांति

निष्कर्ष: अमित शाह का यह दौरा न केवल भाजपा के विकास कार्यों का लेखा-जोखा पेश करने वाला रहा, बल्कि 'घुसपैठ' जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार कर उन्होंने चुनाव की दिशा तय कर दी है।