गुवाहाटी/मार्घेरिटा | असम विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल) से ठीक पहले राज्य की राजनीति में एक भावुक और नैतिक मोड़ सामने आया है। नगाँव से कांग्रेस सांसद और दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई के बुधवार को भाजपा में शामिल होने के बाद, उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रतीक ने मार्घेरिटा विधानसभा क्षेत्र से अपनी कांग्रेस उम्मीदवारी वापस ले ली है।
पिता का भाजपा में जाना और बेटे का नैतिक संकट
बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा का दामन थामा था। इसके कुछ ही घंटों बाद उनके बेटे प्रतीक, जो असम प्रदेश कांग्रेस (APCC) के सोशल मीडिया विभाग के सह-अध्यक्ष भी हैं, ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा भेज दिया।
प्रतीक बोरदोलोई के पत्र की मुख्य बातें:
भ्रम की स्थिति: प्रतीक ने स्पष्ट किया कि पिता के दूसरी पार्टी में जाने के बाद, यदि वे कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में बने रहते, तो कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच उनकी वफादारी को लेकर भ्रम पैदा हो सकता था।
नैतिकता का हवाला: उन्होंने कहा, "मार्घेरिटा के लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता उम्मीदवार के बारे में पूरी स्पष्टता के हकदार हैं। बदले हालात में मेरा चुनाव लड़ना उचित नहीं होगा।"
कांग्रेस में अटूट विश्वास: प्रतीक ने दोहराया कि वे चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के आदर्शों और संगठन के प्रति उनका विश्वास आज भी मजबूत है। वे पार्टी द्वारा दी गई किसी भी अन्य जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं।
गौरव गोगोई का समर्थन और परिवार में 'स्वतंत्रता'
इस नाटकीय घटनाक्रम के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने प्रतीक पर पूरा भरोसा जताया था।
गौरव गोगोई का स्टैंड: APCC प्रमुख गौरव गोगोई ने प्रतीक का समर्थन करते हुए कहा था कि उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला पूरी तरह उनका अपना होगा।
प्रद्युत बोरदोलोई का बयान: भाजपा में शामिल होते समय प्रद्युत ने भी स्पष्ट किया था कि उनके परिवार में राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं और उनके इस कदम का असर उनके बेटे के निर्णयों पर नहीं पड़ेगा।
मार्घेरिटा का चुनावी समीकरण
मार्घेरिटा सीट प्रद्युत बोरदोलोई का गढ़ रही है, जहाँ से वे चार बार विधायक रहे। हालांकि, 2016 में भाजपा ने यहाँ कब्जा कर लिया था। अब प्रतीक के नाम वापस लेने के बाद कांग्रेस के सामने इस महत्वपूर्ण सीट पर नया और मजबूत चेहरा उतारने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
राजनीतिक गलियारों की चर्चा: जहाँ एक ओर प्रद्युत बोरदोलोई को भाजपा द्वारा दिसपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है, वहीं प्रतीक बोरदोलोई ने टिकट वापस कर भारतीय राजनीति में 'नैतिकता और पार्टी अनुशासन' की एक नई मिसाल पेश की है।





