गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव के रण में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान तकनीकी आधार पर कांग्रेस के तीन प्रमुख उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है। इनमें सबसे चर्चित नाम विदिशा नेओग का है, जो हाई-प्रोफाइल 'जलुकबारी' सीट से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को चुनौती दे रही थीं।

इन सीटों पर कटी कांग्रेस की उम्मीदवारी

निर्वाचन आयोग (ECI) की वेबसाइट के अनुसार, कांग्रेस के निम्नलिखित तीन दिग्गजों के नामांकन खारिज हुए हैं:

जलुकबारी: विदिशा नेओग (मुख्यमंत्री के विरुद्ध प्रत्याशी)

ढकुआखाना: आनंद नराह

हाफलोंग: निर्मल लंगथासा

विदित हो कि ढकुआखाना सीट पर वर्तमान में बीजेपी के पूर्व मंत्री नबा कुमार डोले का कब्जा है। वहीं, हाफलोंग में एक दिलचस्प मोड़ आया है—बीजेपी की कैबिनेट मंत्री नंदिता गारलोसा, जो रविवार को ही कांग्रेस में शामिल हुई थीं, उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया है।

अब तक 18 नामांकन रद्द; निर्दलीयों पर गिरी गाज

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 18 नामांकन पत्र खारिज किए जा चुके हैं। इनमें विभिन्न दलों की स्थिति इस प्रकार है:

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 3 उम्मीदवार

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल: 3 उम्मीदवार

SUCI (कम्युनिस्ट) और अपनी जनता पार्टी: 1-1 उम्मीदवार

निर्दलीय: 8 उम्मीदवार

गौरतलब है कि 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए कुल 815 से अधिक उम्मीदवारों ने 1389 नामांकन पत्र दाखिल किए थे।

सुरक्षा और शुचिता पर चुनाव आयोग का 'मास्टर प्लान'

चुनाव आयोग ने असम समेत 5 चुनावी राज्यों (केरल, बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी) में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। आयोग ने पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:

आर्थिक आसूचना इकाई (EIU) सक्रिय: वोटर्स को लुभाने के लिए पैसे और शराब के इस्तेमाल पर रोक लगाने हेतु 6 साल बाद इस यूनिट को फिर से सक्रिय किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी नजर: असम और पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगती सीमाओं पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।

प्रलोभन-मुक्त मतदान: अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एमडीसीईआई (MDCEI) के साथ समन्वय बढ़ाकर 'हिंसा-मुक्त' चुनाव की रणनीति तैयार की गई है।

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री के खिलाफ उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन सीटों पर अपनी अगली रणनीति क्या बनाती है।