घरेलू विमानन कंपनियों (Airlines) को महंगाई का दोहरा झटका लगा है। मंगलवार (1 सितंबर) को तेल विपणन कंपनियों ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की कीमतों में लगातार दूसरे महीने 5.46% का इजाफा किया है। इस फैसले के तुरंत बाद शेयर बाजार खुलते ही विमानन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई, जिससे इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन को बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में लगभग ₹5,485 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।
ATF की कीमतों में कितना हुआ इजाफा?
पिछले दो महीनों में जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की गई है, जिससे अप्रैल 2025 के बाद मिली राहत का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा खत्म हो गया है:
- नई दरें: दिल्ली में एटीएफ की कीमत ₹115 प्रति लीटर से बढ़कर ₹121.28 प्रति लीटर हो गई है।
- महीने दर महीने बढ़ोतरी: अगस्त में हुई 7.5% की तेजी के बाद यह लगातार दूसरी बढ़ोतरी (5.46%) है।
- कीमत निर्धारण का आधार: इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ईंधन दरों और फॉरेक्स (Forex) दरों के आधार पर कीमतें संशोधित करती हैं।
शेयर बाजार पर असर: इंडिगो और स्पाइसजेट में गिरावट
ईंधन महंगा होने से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत (Operating Cost) बढ़ने की आशंका में निवेशकों ने शेयर बेचना शुरू कर दिया:
| एयरलाइन कंपनी | शेयर का भाव (NSE) | गिरावट (रुपये / %) | मार्केट कैप पर असर |
| InterGlobe Aviation (IndiGo) | ₹5,087.50 | ▼ ₹146.50 (-2.80%) | मार्केट कैप ₹2,00,448 करोड़ से घटकर ₹1,94,963 करोड़ (₹5,484.87 करोड़ का नुकसान) हुआ। |
| SpiceJet | ₹10.23 | ▼ ₹0.09 (-0.87%) | शेयर में मामूली गिरावट के साथ बिकवाली का दबाव। |
एयरलाइंस और यात्रियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
- परिचालन लागत में भारी वृद्धि: किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 35% से 40% होती है। ऐसे में जेट फ्यूल का महंगा होना सीधे तौर पर एयरलाइंस के मुनाफे पर असर डालता है।
- हवाई किराए बढ़ने के आसार: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एटीएफ की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं और एयरलाइंस किराए (Airfares) नहीं बढ़ाती हैं, तो उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ेगा। नतीजतन, आने वाले आगामी त्योहारी सीजन में हवाई टिकटों के दाम बढ़ सकते हैं।





