कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग (EC) की नई 'अंडर एडजुडिकेशन' (विचाराधीन) श्रेणी पर कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि लगभग 62 लाख मतदाताओं का नाम इस श्रेणी में डालकर उनके मताधिकार को खतरे में डाल दिया गया है।

चुनाव आयोग के दरवाजे से लौटी कांग्रेस

गुरुवार को बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आशुतोष चटर्जी ने बताया कि 2 मार्च को ईमेल भेजने के बावजूद आयोग ने मिलने का समय नहीं दिया। मजबूरन पार्टी को गेट पर ही अपना ज्ञापन सौंपना पड़ा।

"चुनाव आयोग के किसी अधिकारी ने हमसे मुलाकात नहीं की। हमने अपना ज्ञापन गेट पर ही छोड़ दिया। यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।" — आशुतोष चटर्जी, महासचिव (संगठन), WBPCC

अधीर रंजन चौधरी जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मतदाता सूची में सुधार नहीं होता, चुनाव नहीं होने चाहिए।

अधीर का स्टैंड: "60 लाख से ज्यादा मतदाताओं का भविष्य अधर में है। मैं इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा हूँ।"

कांग्रेस की तीन मुख्य मांगें:

समय सीमा का निर्धारण: न्यायिक अधिकारियों द्वारा 'विचाराधीन' मतदाताओं की सुनवाई के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए।

प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव टलें: जब तक हर वैध मतदाता का नाम सूची में स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक चुनावी प्रक्रिया शुरू न की जाए।

स्पष्ट दिशा-निर्देश: सूची से बाहर किए गए पात्र मतदाताओं के पुन: नामांकन के लिए पारदर्शी गाइडलाइंस जारी हों।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने यहाँ तक कह दिया कि यदि यह संभव नहीं है, तो 2024 के लोकसभा चुनाव वाली पुरानी वोटर लिस्ट पर ही चुनाव कराए जाएं।

आंकड़ों में 'अजीब' विसंगति

कांग्रेस ने ज्ञापन में एक चौंकाने वाले आंकड़े का जिक्र किया है। पार्टी के अनुसार:

नाम जोड़ने के लिए 9.64 लाख आवेदन मिले, लेकिन केवल 1.82 लाख ही स्वीकार किए गए।

इसके विपरीत, नाम हटाने (Form 7) के लिए केवल 99 हजार आवेदन आए थे, लेकिन 5.46 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए।

वामपंथी दलों का प्रदर्शन और सिविल सोसाइटी का साथ

इधर कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर चल रहा वामपंथी दलों का धरना गुरुवार को समाप्त हो गया। माकपा नेता बिमान बोस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल से मुलाकात की। इस प्रदर्शन में पर्वतारोही पियाली बसाक और अभिनेता चंदन सेन जैसी नागरिक समाज की हस्तियों ने भी हिस्सा लिया।

निष्कर्ष

असम के 'D-Voters' (संदिग्ध मतदाता) की तर्ज पर बंगाल में लागू की गई इस नई व्यवस्था ने राज्य में 'प्रेसिडेंट रूल' जैसी स्थिति की आशंकाएं पैदा कर दी हैं। भाजपा को छोड़कर राज्य के लगभग सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं।