कोलकाता | राजनीतिक विशेष संवाददाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बिगुल बज चुका है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपना अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी गेम प्लान धरातल पर उतार दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहाँ चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए 'मिशन 226' पर काम कर रही हैं, वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने '250 पार' का लक्ष्य रखकर भाजपा को 50 सीटों से नीचे समेटने की रणनीति तैयार की है।

बुआ-भतीजे की 'ट्विन ट्रैक' स्ट्रेटजी

TMC ने इस बार अपनी चुनावी मशीनरी को दो हिस्सों में बांटा है। ममता बनर्जी जहाँ उत्तर बंगाल में भाजपा के गढ़ को ढहाने के लिए भावनात्मक कनेक्ट और 'बंगाली अस्मिता' का मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं अभिषेक बनर्जी दक्षिण बंगाल में डेटा और संगठनात्मक ताकत के दम पर किलेबंदी कर रहे हैं।

ममता का अंदाज: वे महिलाओं के बीच 'लक्ष्मीर भंडार' जैसी योजनाओं और अपनी 'शेरनी' वाली छवि के जरिए सीधा संवाद कर रही हैं।

अभिषेक का डेटा: अभिषेक का ध्यान उन 34 सीटों पर है जहाँ 2021 में जीत का अंतर 5,000 से कम था।

SIR और वोटर लिस्ट: चुनौती को बनाया अवसर

वोटर लिस्ट में हुए 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के कारण भारी संख्या में नाम हटाए जाने को TMC ने एक बड़ा मुद्दा बनाया है।

आंकड़ों का खेल: समसेरगंज और गैघाटा जैसी सीटों पर डिलीशन का आंकड़ा पिछले जीत के मार्जिन से कहीं ज्यादा है। अभिषेक बनर्जी ने इसे 'अवसर' में बदलते हुए वादा किया है कि TMC की वापसी होते ही हटाए गए सभी नाम फिर से जोड़े जाएंगे।

बूथ स्तर पर 'शैडो एजेंट्स' और वॉर रूम

अभिषेक बनर्जी का असली गेम प्लान पार्टी के तकनीकी और जमीनी नेटवर्क में छिपा है:

माइक्रो मीटिंग्स: बड़ी रैलियों के अलावा हर बूथ पर हफ्ते में 2-3 छोटी सभाएं हो रही हैं, जिनमें 250-300 लोगों से सीधा संवाद किया जा रहा है।

वॉर रूम: सभी 294 सीटों पर हाई-टेक वॉर रूम बनाए गए हैं, जहाँ 20 सदस्यीय टीम डेटा और BLOs की गतिविधियों पर नजर रख रही है।

शैडो एजेंट्स: एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ता वोटर लिस्ट के हर बदलाव और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों (Beneficiaries) को ट्रैक कर रहे हैं।

डेटा और संस्कृति का अनूठा मेल

TMC इस बार केवल भाषणों पर निर्भर नहीं है। पार्टी ने बंगाली परंपरा 'पंचाली' शैली का उपयोग कर अपना रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। साथ ही, 'सांप-सीढ़ी' के खेल के जरिए विकास की 10 प्रतिज्ञाओं को सीढ़ी और विपक्षी बाधाओं को सांप के रूप में दिखाकर जनता तक अपनी बात पहुँचा रही है।

निष्कर्ष: क्या सफल होगा 'प्लान 250'?

अभिषेक बनर्जी का मानना है कि यदि TMC 250 सीटें जीतती है, तो राज्य में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा। 2021 में 215 सीटें जीतने वाली ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनकी 'शेरनी' वाली छवि की सबसे बड़ी परीक्षा है। 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि अभिषेक का यह 'डेटा-ड्रिवन' गेम प्लान ममता बनर्जी को चौथी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा पाता है या नहीं।

चुनाव डायरी:

पहला चरण (152 सीटें): 23 अप्रैल

दूसरा चरण (142 सीटें): 29 अप्रैल

नतीजे: 4 मई