हुगली | समाचार डेस्क पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के प्रचार के आखिरी दिन हुगली जिले का गोघाट रणक्षेत्र बन गया। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आरामबाग सांसद मिताली बाग के काफिले पर हुए हमले और उसके बाद भाजपा-टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़पों ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। घटना के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5 घंटे के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सांसद मिताली बाग पर हमला और घायल होने की खबर
जानकारी के अनुसार, आरामबाग से सांसद मिताली बाग गोघाट के बर्मा इलाके में प्रचार कर रही थीं।
घटनाक्रम: सांसद का आरोप है कि जब उनकी एसयूवी भाजपा प्रत्याशी प्रशांत दिगर के चुनाव कार्यालय के पास से गुजर रही थी, तभी लाठीधारी भीड़ ने वाहन को घेर लिया और पत्थरों व डंडों से हमला कर दिया।
चोटें और अस्पताल: हमले में गाड़ी का अगला शीशा टूट गया, जिससे आगे की सीट पर बैठी मिताली बाग को कांच लगने से चोटें आईं। उन्हें तुरंत आरामबाग मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उनसे मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया।
TMC बनाम BJP: आरोपों का दौर
सांसद ने सीधे तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है और घटना का एक फेसबुक लाइव वीडियो भी साझा किया है। दूसरी ओर:
भाजपा का पलटवार: भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने इन आरोपों को 'टीएमसी का नाटक' करार दिया।
कार्यकर्ताओं में भिड़ंत: गोघाट के बर्मा इलाके में दोनों दलों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। भाजपा का दावा है कि उनके 50 कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जबकि टीएमसी ने भाजपा पर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अशांति फैलाने और बमबाजी करने का आरोप लगाया है।
चुनाव आयोग सख्त: 'अंदरूनी विवाद' की आशंका?
इस हाई-प्रोफाइल हमले के बाद चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
प्रारंभिक रिपोर्ट: जिला निर्वाचन अधिकारी की शुरुआती रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि यह घटना टीएमसी के अंदरूनी विवाद का परिणाम हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस ने इस रिपोर्ट पर कड़ा ऐतराज जताया है।
कार्रवाई के निर्देश: आयोग ने पुलिस को तत्काल FIR दर्ज कर 5 घंटे के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी और सीसीटीवी फुटेज की जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
ताजा स्थिति:
पुलिस ने अब तक भाजपा से जुड़े 3 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय बलों की अतिरिक्त तैनाती कर दी गई है।
सांसद के फेसबुक लाइव वीडियो को साक्ष्य के तौर पर जांचा जा रहा है।
निष्कर्ष
अंतिम चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले हुई इस हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ एक तरफ राजनीतिक दल एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं, वहीं आम जनता के मन में शांतिपूर्ण मतदान को लेकर चिंता बनी हुई है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के जरिए सच्चाई तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।
संपादकीय सारांश: लोकतंत्र के पर्व में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हुगली की यह घटना दर्शाती है कि चुनाव प्रचार के आखिरी घंटों में राजनीतिक पारा किस कदर बढ़ गया है। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती मतदान के दिन शांति व्यवस्था बनाए रखना है।





