कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर 'नंदीग्राम' जैसी हाई-प्रोफाइल जंग की आहट सुनाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके अपने ही गढ़ भवानीपुर में घेरने के लिए एक बेहद सोची-समझी चक्रव्यूह रचना शुरू कर दी है। इस मिशन की कमान सौंपी गई है विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को, जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी।

🎯 क्या है बीजेपी की 'दोहरी मार' वाली रणनीति?

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, भवानीपुर पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

प्रचार में बाधा: ममता बनर्जी को उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में इतना व्यस्त कर देना कि वे राज्य के अन्य हिस्सों में चुनाव प्रचार के लिए कम समय निकाल पाएं।

मनोवैज्ञानिक दबाव: राज्य भर के तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच यह नैरेटिव (विमर्श) सेट करना कि "जब दीदी अपनी ही सीट पर सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य का क्या होगा?"

🏟️ होली पर भी नहीं थमा चुनावी घमासान

जहाँ अन्य नेता होली के जश्न में डूबे थे, शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के बजाय भवानीपुर को अपना केंद्र बनाया। उन्होंने यहाँ रैलियां कीं, धार्मिक गीतों में भाग लिया और ममता के गढ़ में खड़े होकर 'हिंदू एकता' का आह्वान किया। सूत्रों की मानें तो यदि अंतिम समय में समीकरण नहीं बदले, तो शुभेंदु एक बार फिर ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

📊 आंकड़ों का खेल और बढ़ती चिंता

भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में हाल के आंकड़ों ने तृणमूल कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं:

वोटर लिस्ट में बदलाव: लगभग 47,000 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और 14,000 से अधिक नाम 'न्यायिक प्रक्रिया' के अधीन हैं। ममता बनर्जी ने खुद आरोप लगाया है कि बीजेपी उनके क्षेत्र से 60,000 वोटर्स के नाम कटवा रही है।

घटता अंतर: 2024 के लोकसभा चुनावों में, भवानीपुर सेगमेंट में तृणमूल की बढ़त घटकर मात्र 8,297 रह गई, जबकि 2021 के उपचुनाव में यह 58,000 से अधिक थी।

वार्डों की स्थिति: 2024 में बीजेपी ने भवानीपुर के 8 में से 5 वार्डों में बढ़त हासिल की, जो मुख्यमंत्री के लिए खतरे की घंटी है।

🗣️ वार-पलटवार: किसने क्या कहा?

"मेरे भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 60,000 मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है। लेकिन मैं कहती हूं कि अगर सिर्फ एक मतदाता भी बचा, तब भी मैं भवानीपुर से जीतूंगी।" — ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री

"बीजेपी केवल मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रही है। 2021 में केवल 57% मतदान हुआ था, जिसका मतलब है कि लाखों लोग शिफ्ट हो चुके हैं या मृत हैं। वे असली मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके खिलाफ हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।" — अरूप चक्रवर्ती, टीएमसी प्रवक्ता

🧐 विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, "यह रणनीति ममता बनर्जी पर दबाव बनाने और टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने में कारगर हो सकती है। लेकिन, बीजेपी की जीत तभी संभव है जब कोलकाता के शहरी मतदाता बड़े पैमाने पर भगवा खेमे की ओर रुख करें।"