पटना/बागडोगरा। बिहार की राजनीति आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और राज्यसभा जाने की आधिकारिक पुष्टि के बाद, उनके उत्तराधिकार और भविष्य की सरकार के स्वरूप को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आज का दिन विशेष रूप से निशांत कुमार के राजनीतिक पदार्पण और सम्राट चौधरी की अमित शाह के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात के लिए चर्चा में है।
1. निशांत कुमार का राजनीतिक उदय: चंपारण से शुरुआत
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार आज दोपहर 1:00 बजे जदयू (JDU) की विधिवत सदस्यता ग्रहण करेंगे।
चंपारण से यात्रा: अपने पिता की परंपरा को दोहराते हुए निशांत अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत चंपारण से करेंगे।
बड़ी जिम्मेदारी: पार्टी सूत्रों के अनुसार, निशांत को नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पुष्टि की है कि निशांत अब संगठन और सरकार में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
2. नीतीश कुमार की अंतिम 'समृद्धि यात्रा'
मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार अपनी अंतिम और 16वीं यात्रा 'समृद्धि यात्रा' पर निकल रहे हैं।
शेड्यूल: यह यात्रा 10 मार्च से 13 मार्च तक चलेगी, जिसमें वे उत्तर बिहार के प्रमुख जिलों (सुपौल, किशनगंज, अररिया, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया) का दौरा करेंगे।
पुराना साथ: यात्रा के दौरान वे मधेपुरा में अपने पुराने मित्र ललन सराफ के घर प्रवास करेंगे, जिसे उनकी विदाई यात्रा (Farewell Yatra) के रूप में देखा जा रहा है।
3. अमित शाह और सम्राट चौधरी की मुलाकात
बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी सिलसिले में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी आज पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरपोर्ट पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे।
नया चेहरा: चर्चा है कि इस बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है। सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं, जबकि नित्यानंद राय के नाम पर भी अटकलें तेज हैं।
एजेंडा: इस बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति और नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बनने वाली नई कैबिनेट के स्वरूप पर अंतिम मुहर लग सकती है।
4. राज्यसभा की ओर बढ़ते कदम
नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्यसभा जाकर अपनी विधायी यात्रा पूरी करना चाहते हैं। वे 16 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं। उनके इस कदम को बिहार में 'नीतीश युग' के समापन और भाजपा-जदयू के बीच नए शक्ति संतुलन (Power Shift) के रूप में देखा जा रहा है।





