पटना। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। मंगलवार को तेजस्वी यादव के आवास पर हुई आरजेडी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM नदारद रही। इस दूरी ने महागठबंधन के भीतर वोटों के गणित को उलझा दिया है।
तेजस्वी की 'चुप्पी' पर ईमान की नाराजगी
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी साफ जाहिर की। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
संपर्क का अभाव: अख्तरुल ईमान ने दावा किया कि तेजस्वी यादव ने दिल्ली से लौटने के बाद उनसे कोई बात नहीं की है, जबकि उन्होंने मुलाकात का वादा किया था।
बैठक की जानकारी नहीं: उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें तेजस्वी यादव की बैठक की कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी। उन्होंने इसे तेजस्वी की 'पारिवारिक बैठक' करार दिया।
जरूरत पर सवाल: ईमान ने तंज कसते हुए कहा, "यह तेजस्वी यादव से पूछिए कि क्या उन्हें हमारी जरूरत है? जब उन्हें जरूरत पड़ेगी, तब हम फैसला करेंगे।"
AIMIM की शर्त: 'उच्च सदन में मिले प्रतिनिधित्व'
एआईएमआईएम की मुख्य मांग यह है कि इस बार महागठबंधन उन्हें राज्यसभा भेजने में सहयोग करे।
ईमान का तर्क है कि उच्च सदन (राज्यसभा) में एआईएमआईएम का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
उन्होंने पहले भी अपील की थी कि यदि महागठबंधन 'समझदारी' से काम ले, तो वे बीजेपी को चुनौती दे सकते हैं।
राज्यसभा का गणित: आरजेडी के लिए मुश्किल चुनौती
बिहार में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है।
महाठबंधन की स्थिति: आरजेडी, कांग्रेस और वामदलों को मिलाकर संख्या बल केवल 35 के आसपास सिमट रहा है।
NDA का पलड़ा भारी: एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसकी 4 सीटों पर जीत तय मानी जा रही है।
पेच: पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प है। यदि AIMIM (जिसके पास महत्वपूर्ण वोट हैं) आरजेडी का साथ नहीं देती, तो आरजेडी प्रत्याशी की राह बेहद मुश्किल हो जाएगी।
आगे क्या?
अख्तरुल ईमान ने भविष्य की रणनीति पर सस्पेंस बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि "कल का मौसम कैसा होगा, उसके अनुसार देखेंगे" और अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व (ओवैसी) से चर्चा के बाद लिया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
बैठक: तेजस्वी यादव के घर आरजेडी विधायकों की मंथन बैठक जारी।
विवाद: AIMIM को न्योता न मिलने और तेजस्वी की अनदेखी से पार्टी नाराज।
संख्या बल: 41 वोटों की दरकार, महागठबंधन के पास केवल 35 का आंकड़ा।





