पटना: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले मतदान ने राज्य के सियासी पारे को चरम पर पहुँचा दिया है। मैदान में 6 उम्मीदवारों की मौजूदगी ने पांचवीं सीट के लिए मुकाबले को बेहद दिलचस्प और कड़ा बना दिया है। इस 'अग्निपरीक्षा' में क्लीन स्वीप करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
रणनीति की रात: सम्राट चौधरी के आवास पर मंथन
गुरुवार देर रात उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास पर एनडीए विधायकों की एक मैराथन बैठक हुई। इस बैठक की कमान छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने संभाली।
बैठक के मुख्य बिंदु:
'नो मिस्टेक' पॉलिसी: विधायकों को मतदान की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया ताकि कोई भी वोट अमान्य (Invalid) न हो।
नजरबंदी की सलाह: सभी विधायकों को 16 मार्च तक पटना न छोड़ने और अवांछित फोन कॉल्स से सावधान रहने का निर्देश दिया गया है।
एकजुटता का संदेश: बैठक में प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार ने विधायकों को संबोधित कर गठबंधन की मजबूती पर जोर दिया।
विधानसभा का अंकगणित: किसके पास कितना दम?
पांचवीं सीट की चाबी आंकड़ों के खेल में छिपी है। वर्तमान संख्या बल के अनुसार एनडीए काफी मजबूत स्थिति में है:
| गठबंधन/दल | विधायक संख्या | प्रमुख दल |
|---|---|---|
| NDA | 202 | भाजपा (89), जदयू (85), लोजपा-आर (19), HAM (5), RLM (4) |
| महागठबंधन | 39 | राजद (25), कांग्रेस (6), वामदल (8) |
| अन्य (निर्णायक) | 06 | AIMIM (5), BSP (1) |
जीत का गणित: भाजपा और जदयू को 2-2 सीटें मिलना लगभग तय है। पांचवीं सीट के लिए NDA को 3 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है, जबकि महागठबंधन को 6 अतिरिक्त वोटों की दरकार है।
'किंगमेकर' की भूमिका में ओवैसी और मायावती की पार्टी
इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM (5 विधायक) और बसपा (1 विधायक) की भूमिका निर्णायक हो गई है। एनडीए की रणनीति इन 'अन्य' विधायकों को अपने पाले में लाकर पांचों सीटों पर कब्जा जमाने की है। यदि ओवैसी के विधायक एनडीए की ओर झुकते हैं, तो महागठबंधन की राहें लगभग बंद हो जाएंगी।
अगले दो पड़ाव: बैठकों का दौर जारी
रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए अभी दो और बड़ी बैठकें होनी हैं:
14 मार्च: उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर रणनीतिक चर्चा।
15 मार्च: संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी के आवास पर 'फाइनल रिहर्सल'।
विशेषज्ञ विश्लेषण: बिहार की राजनीति में यह चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की एकजुटता का लिटमस टेस्ट भी है।





