पटना। बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव (2026) की आहट के साथ ही सरगर्मियां तेज हो गई हैं। महागठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक होने के दावों के बीच कांग्रेस के तीन विधायकों के रुख ने विपक्षी खेमे की चिंता बढ़ा दी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा बुलाई गई अहम रणनीतिक बैठक से इन विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

एक-एक वोट का गणित और बढ़ती बेचैनी

राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर महागठबंधन के लिए अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में गठबंधन के हर एक विधायक का वोट निर्णायक साबित होने वाला है।

तेजस्वी यादव ने इसी एकजुटता को प्रदर्शित करने और साझा रणनीति बनाने के लिए सभी घटक दलों की बैठक बुलाई थी, लेकिन कांग्रेस के तीन विधायकों का न पहुंचना नेतृत्व के लिए 'पहेली' बना हुआ है।

कांग्रेस की सफाई: 'रोजा' या कुछ और?

विधायकों की अनुपस्थिति पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस प्रवक्ता ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। पार्टी की ओर से तर्क दिया गया है कि पवित्र रमजान माह और रोजा होने के कारण विधायक बैठक में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव जैसे संवेदनशील समय पर विधायकों की यह दूरी महज इत्तेफाक नहीं हो सकती।

मुख्य चिंता के बिंदु:

एकजुटता पर सवाल: क्या कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एक पाले में रख पाएगी?

रणनीतिक चूक: तेजस्वी की बैठक से अनुपस्थिति क्या सहयोगी दलों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है?

आरजेडी की उम्मीदें: राजद प्रत्याशी की जीत पूरी तरह से महागठबंधन के 'इंटैक्ट' (एकजुट) रहने पर टिकी है।

फिलहाल, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों को साधने और सहयोगियों को आश्वस्त करने में जुटा है। देखना दिलचस्प होगा कि मतदान के दिन महागठबंधन अपनी एकजुटता को वोट में तब्दील कर पाता है या नहीं।