लखनऊ | विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी बुगाहट तेज हो गई है। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के दौरों के बाद, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कमान संभालते हुए प्रदेश के सभी छह सांगठनिक क्षेत्रों में समन्वय बैठकों का चक्र पूरा कर रहे हैं।
'ट्रिपल S' मॉडल: समन्वय की नई शक्ति
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार 'सरकार (Government), संगठन (Organization) और संघ (RSS)' के समन्वय वाले 'ट्रिपल S' मॉडल पर काम कर रही है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य सत्ता और संगठन के बीच की दूरियों को पाटकर एक अभेद्य किला तैयार करना है।
रणनीति: आंतरिक कलह, जातीय समीकरणों का उबाल और हालिया विवादों से होने वाले संभावित नुकसान की काट ढूंढना।
कार्यकर्ता संपर्क: नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाने और उनके मनोबल को बढ़ाने पर विशेष जोर।
सामंजस्य: जनप्रतिनिधियों और धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करना।
मैराथन बैठकों का दौर: गाजियाबाद से वाराणसी तक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद हर क्षेत्र की नब्ज टटोल रहे हैं।
| तिथि | क्षेत्र/स्थान | प्रमुख प्रतिभागी |
|---|---|---|
| 28 फरवरी | लखनऊ | सीएम योगी, पंकज चौधरी, धर्मपाल सिंह व संघ पदाधिकारी |
| 1 मार्च | वाराणसी | क्षेत्रीय पदाधिकारी एवं सामाजिक विमर्श |
| 2 मार्च | गोरखपुर | स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों की समीक्षा |
| 5 मार्च | गाजियाबाद (पश्चिम) | आगामी बैठक |
| 6 मार्च | कानपुर | आगामी बैठक |
| 7 मार्च | आगरा (ब्रज) | आगामी बैठक |
बड़े बदलाव के संकेत: मंत्रिमंडल और संगठन में हलचल
इन समन्वय बैठकों की 'टाइमिंग' सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि होली के ठीक बाद होने वाली ये बैठकें प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े फेरबदल की प्रस्तावना हो सकती हैं।
चर्चाएं गर्म हैं कि: > 1. प्रदेश संगठन के ढांचे में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं।
2. योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल के जरिए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को नया स्वरूप दिया जा सकता है।
जमीनी हकीकत और चुनौतियां
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अनुसार, इन बैठकों में न केवल बड़े राजनीतिक मुद्दों बल्कि क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं पर भी गहन मंथन हो रहा है। भाजपा का लक्ष्य आगामी चुनाव से पहले हर उस छेद को बंद करना है जिससे विपक्ष को सेंधमारी का मौका मिल सके। संघ की सक्रियता यह साफ करती है कि वैचारिक धरातल पर भी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।





