नई दिल्ली/पटना।

बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें साल 2018 में नए साल की पार्टी के दौरान हुई एक महिला की मौत के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide not amounting to murder) का दोषी करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद विधायक को तुरंत हिरासत में ले लिया गया है। अब मंगलवार यानी 9 जून को उनकी सजा की अवधि पर अदालत में बहस होगी।

2018 का वो न्यू ईयर जश्न, जो मातम में बदल गया

यह पूरा मामला दिसंबर 2018 की आखिरी रात का है। दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित विधायक राजू कुमार सिंह के फार्महाउस पर नए साल का जश्न चल रहा था। आरोप है कि इसी दौरान विधायक द्वारा की गई हवाई फायरिंग की चपेट में आने से डॉ. अर्चना गुप्ता नाम की एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए शनिवार को विधायक को दोषी ठहराया। हालांकि, इस मामले में सबूत मिटाने के आरोपी बनाए गए विधायक की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य करीबियों (राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह) को कोर्ट ने बरी कर दिया है।

किन धाराओं में दोषी और कितनी हो सकती है सजा?

राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा विधायक को भारतीय दंड संहिता (IPC) और आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया है:

आईपीसी की धारा 304 (भाग II): यह धारा तब लगाई जाती है जब आरोपी को यह पता हो कि उसके कृत्य (जैसे भीड़ में फायरिंग) से किसी की जान जा सकती है, भले ही उसका इरादा हत्या का न हो। इसमें अधिकतम 10 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।

आर्म्स एक्ट की धारा 30: हथियार के लाइसेंस या नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में इसके तहत 6 महीने तक की जेल, ₹2,000 का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

दांव पर लगी प्रधानी: सदस्यता रद्द होने का मंडराया खतरा

इस अदालती फैसले के बाद राजू कुमार सिंह के राजनीतिक करियर पर काले बादल मंडराने लगे हैं। 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' के कड़े नियमों के अनुसार, यदि किसी भी मौजूदा सांसद या विधायक को कोर्ट द्वारा 2 साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदन की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।

हाई कोर्ट से ही बची उम्मीद:

कानूनविदों के मुताबिक, सजा का ऐलान होने के बाद राजू कुमार सिंह को हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार तो होगा, लेकिन सिर्फ अपील करने से उनकी विधानसभा सदस्यता नहीं बचेगी। उनकी विधायकी तभी बच सकती है, जब उच्च न्यायालय (High Court) उनकी निचली अदालत द्वारा दी गई 'सजा' (Conviction) पर पूरी तरह से रोक लगा दे। 9 जून को आने वाला फैसला तय करेगा कि साहेबगंज के विधायक जेल जाएंगे या उनकी कुर्सी बची रहेगी।