श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के कद्दावर नेता और सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म कर इसे चीन जैसी 'एक राष्ट्र, एक पार्टी' व्यवस्था में बदलने की साजिश रच रही है।

यह बयान उस समय आया है जब घाटी में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर आंतरिक कलह और विभाजन की अटकलें तेज थीं, जिन पर रूहुल्लाह के इस आक्रामक रुख ने विराम लगा दिया है।

"कश्मीर के बाद अब पूरे भारत की बारी"

सांसद रूहुल्लाह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो प्रयोग जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा (धारा 370) छीनकर और उसकी स्थिति को घटाकर किया गया था, अब वही मॉडल शेष भारत पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पूरे देश को अब उसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जो कश्मीर ने झेला है।

संस्थाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप

रूहुल्लाह ने संवैधानिक और सुरक्षा संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप मढ़े:

संस्थाओं का राजनीतिकरण: उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को एक विशेष विचारधारा के 'सुविधादाता' (Facilitators) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

विपक्ष की आवाज: उनका कहना है कि संविधान अब केवल एक नाममात्र का ढांचा रह गया है, जिसका उपयोग विपक्ष की आवाज दबाने और देश पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए किया जा रहा है।

बंगाल का उदाहरण: उन्होंने पश्चिम बंगाल में अर्धसैनिक बलों की तैनाती और उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराए जाने को लोकतांत्रिक संस्थाओं से समझौते का जीवंत प्रमाण बताया।

मुस्लिम अल्पसंख्यकों के राजनीतिक प्रभाव पर प्रहार

सांसद ने विशेष रूप से असम और बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां परिसीमन (Delimitation) और मतदाता प्रबंधन की प्रक्रियाओं में हेरफेर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को इस तरह बदला गया है जिससे मुस्लिम अल्पसंख्यकों के राजनीतिक प्रभाव को कम किया जा सके और उन्हें मताधिकार से प्रभावी रूप से वंचित किया जा सके।

न्यायपालिका और क्षेत्रीय पहचान

आगा रूहुल्लाह ने न्यायपालिका की भूमिका पर भी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक का अंतिम सहारा अदालत होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों (जैसे SIR मुद्दा) को देखकर लगता है कि वहां भी समझौता किया जा रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता से अपील की कि वे अपनी क्षेत्रीय पहचान और छीने गए अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों और इस विचारधारा के खिलाफ मतदान करें।

निष्कर्ष: संघीय ढांचे को खतरा

रूहुल्लाह की यह आलोचना विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के उस व्यापक विरोध का हिस्सा है, जो भाजपा की 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' और 'एक राष्ट्र, एक भाषा' जैसी नीतियों को भारत के संघीय और विविधतापूर्ण ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा मानते हैं।