गुवाहाटी | पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार असम और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इतिहास रच दिया है। असम में जहाँ हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में NDA ने जीत की शानदार हैट्रिक लगाई है, वहीं बंगाल में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के दुर्ग को ध्वस्त कर बीजेपी पहली बार सत्ता के शिखर पर पहुँची है।
असम: पहली बार अपने दम पर बहुमत, विपक्ष धराशायी
असम विधानसभा की 126 सीटों के नतीजों ने बीजेपी की ताकत को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है:
NDA का दबदबा: गठबंधन ने 102 सीटों के साथ दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है।
ऐतिहासिक आंकड़ा: बीजेपी ने पहली बार असम में अपने दम पर 82 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। सहयोगी दल AGP और BPF को 10-10 सीटें मिली हैं।
विपक्ष की स्थिति: कांग्रेस मात्र 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि AIUDF और रायजोर दल को 2-2 सीटें मिलीं। टीएमसी ने भी राज्य में अपना खाता खोला है।
हिमंता बिस्वा सरमा के तीखे तेवर और तंज
दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हिमंता बिस्वा सरमा ने जीत के बाद विपक्ष पर जमकर निशाना साधा:
पवन खेड़ा पर तंज: सरमा ने मजाकिया लहजे में कहा, "पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने मेरी जीत में मदद की। जब असम पुलिस उन्हें बुलाएगी, तो मैं उन्हें पेड़ा खिलाऊंगा।" उन्होंने यह भी दावा किया कि खेड़ा की वजह से गौरव गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा।
वोट बैंक की राजनीति: सरमा ने दो टूक शब्दों में कहा, "मुझे बांग्लादेशी मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए। यह हिंदुओं और पीएम मोदी की जीत है।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस बार असमिया मुसलमानों ने बीजेपी को खुलकर समर्थन दिया है।
"बंगाल की जीत, देश की जीत है"
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली बार सरकार बनने पर खुशी जाहिर करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बंगाल का यह परिणाम केवल एक राज्य की जीत नहीं बल्कि 'देश की जीत' है। सरमा के अनुसार, 2021 में भी जीत की नींव थी, लेकिन इस बार जनता ने डर के साये से बाहर निकलकर राष्ट्रवाद और सुरक्षा के पक्ष में मतदान किया है।
निष्कर्ष: पूर्वोत्तर और पूर्व में बीजेपी का स्वर्णिम युग
असम में बीजेपी की लगातार तीसरी जीत और बंगाल में सत्ता परिवर्तन ने यह साफ कर दिया है कि पूर्वी भारत की राजनीति अब एक नए ध्रुव की ओर मुड़ चुकी है। हिमंता बिस्वा सरमा अब न केवल असम के कद्दावर नेता, बल्कि पूर्वोत्तर में बीजेपी के सबसे बड़े रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं।





