कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में बयानों के तीर चलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग और अनोखा है। राज्य की नवनिर्वाचित भाजपा विधायक रेखा पात्रा के एक होलिया बयान ने बंगाल के सियासी गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। विधायक ने दावा किया है कि यदि किसी को पशुओं की सही उम्र साबित करनी है, तो उन्हें गाय का 'बर्थ सर्टिफिकेट' (जन्म प्रमाण पत्र) दिखाना होगा। इस बयान के सामने आते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे आड़े हाथों लिया है और भाजपा को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा घटनाक्रम शनिवार का है, जब भाजपा विधायक रेखा पात्रा हिंगलगंज के लेबुखाली इलाके में मौजूद थीं। वहां से गुजर रहे पशुओं से लदे एक वाहन को विधायक ने संदिग्ध मानकर रुकवा लिया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर सभी पशुओं को गाड़ी से नीचे उतरवाया, उन्हें सड़क किनारे पेड़ से बांधा और खुद खड़े होकर उनके लिए चारा-पानी की व्यवस्था करवाई।

विधायक रेखा पात्रा ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर राज्य में अवैध पशु व्यापार और तस्करी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी दौरान उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए 'बर्थ सर्टिफिकेट' की बात कह दी।

क्या कहा भाजपा विधायक ने? "नई गाइडलाइन के अनुसार, 14 वर्ष से कम उम्र के पशुओं का वध नहीं किया जा सकता। ऐसे में अगर कोई पशु को अवैध रूप से ले जा रहा है, तो हमें उसे रोककर गाय का बर्थ सर्टिफिकेट मांगना चाहिए। यदि वे उम्र का वैध प्रमाण नहीं दे पाते हैं, तो कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

टीएमसी का पलटवार: "भाजपा शासित राज्यों में दिखाएं ऐसा सर्टिफिकेट"

रेखा पात्रा के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हास्यास्पद करार दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा पर तंज कसते हुए उन्हें एक खुली चुनौती दे डाली।

कुणाल घोष ने सवाल उठाया:

चुनौती: क्या भाजपा देश के किसी भी एक ऐसे राज्य का नाम बता सकती है या वहां का सर्टिफिकेट दिखा सकती है, जहां गायों के लिए 'बर्थ सर्टिफिकेट' जारी किया जाता हो?

जांच की मांग: अगर भाजपा नेताओं के पास ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण पत्र मौजूद है, तो उसकी सत्यता और उसके आधिकारिक स्रोत की तुरंत जांच होनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी मीम्स और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां भाजपा समर्थक इसे अवैध पशु तस्करी को रोकने के लिए एक कड़ा और आक्रामक रुख बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे पूरी तरह से तर्कहीन और जमीनी हकीकत से परे बयानबाजी करार दे रहा है। फिलहाल, गाय के इस 'बर्थ सर्टिफिकेट' ने बंगाल चुनाव के बाद शांत हो रही राजनीतिक तपिश को एक बार फिर से बढ़ा दिया है।