रायपुर। छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। कांग्रेस के 10 दिनों तक चले प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर पर छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने बेहद तीखा और करारा तंज कसा है। चिमनानी ने इस प्रशिक्षण शिविर की तुलना मशहूर रियलिटी शो 'बिग बॉस' के घर से करते हुए आरोप लगाया कि यहाँ कार्यकर्ताओं को जनता की सेवा का नहीं, बल्कि सिर्फ एक खास परिवार की परिक्रमा करने का पाठ पढ़ाया गया है।

"राहुल गांधी आए, मैगी खाई और चले गए"

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राहुल गांधी, जिन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी 'प्रशिक्षण' शब्द का असली मतलब तक नहीं समझा, वे खुद कार्यकर्ताओं को ज्ञान बांटने पहुंच गए।

कटाक्ष करते हुए चिमनानी ने कहा:

"राहुल गांधी को न तो कार्यकर्ताओं की कोई चिंता थी और न ही प्रशिक्षण से कोई लेना-देना था। वे इस शिविर में केवल खानापूर्ति करने के लिए आए थे, वहाँ 'मैगी' खाई और वापस लौट गए। यह पूरा आयोजन सिर्फ एक राजनीतिक तमाशा बनकर रह गया।"

ट्रेनर्स पर भी उठाए सवाल: 'दूसरों को सुधारने आए या बिगाड़ने?'

चिमनानी ने शिविर में पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय चेहरों पर भी सवाल दागे। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, पवन खेड़ा और अलका लाम्बा जैसे नेता, जो खुद 'अप्रशिक्षित' हैं, वे दूसरों को क्या प्रशिक्षित करेंगे? उन्होंने सवाल उठाया कि ये नेता वहाँ कार्यकर्ताओं को कुछ सिखाने आए थे या उन्हें और बिगाड़ने आए थे।

'कांग्रेस के लिए प्रशिक्षण का मतलब- जनता की जेब पर डाका'

बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस के भविष्य पर गहरा संकट बताते हुए कहा कि देश के गिने-चुने राज्यों तक सिमट चुकी कांग्रेस पार्टी का भविष्य अब पूरी तरह अंधकारमय है और आने वाले समय में यह देश के राजनीतिक नक्शे से पूरी तरह गायब हो जाएगी।

उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए 'प्रशिक्षण' शब्द का अर्थ बेहद सीमित है। उनके लिए इसका सीधा मतलब है—जनता की जेब पर डाका डालकर अपनी जेबें भरना और गांधी परिवार की चाकरी करके पार्टी में अपना नंबर बढ़ाना। चिमनानी ने साफ किया कि देश की जनता हमेशा नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वालों को मौका देती है, भ्रष्टाचार के जरिए देश को लूटने वालों को नहीं।