नई दिल्ली: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बाद भारत की विदेश नीति को लेकर देश के भीतर भी सियासी पारा चढ़ गया है। जहाँ एक तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा कर रही है, वहीं पार्टी के ही दो दिग्गज और अनुभवी नेताओं— मनीष तिवारी और शशि थरूर ने सरकार के 'सावधानी भरे रुख' का पुरजोर समर्थन किया है।
इन दोनों वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस संकट के समय भारत को किसी का पक्ष लेने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मनीष तिवारी: 'रणनीतिक स्वायत्तता' ही असली ताकत
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह युद्ध भारत का नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का वर्तमान रुख पूरी तरह सही है क्योंकि भारत के अपने हित दांव पर लगे हैं।
"रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का असली अर्थ यही है कि हम विरोधाभासी स्थितियों के बीच से अपना रास्ता निकालें। हमें तेल, गैस, खाद की आपूर्ति और विदेशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।" — मनीष तिवारी
शशि थरूर: 'हमारी चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है'
पूर्व राजनयिक और केरल से सांसद शशि थरूर ने भी सरकार के संयम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर हर बार जोर से बोलना जरूरी नहीं होता।
संयम ही शक्ति: थरूर के अनुसार, सिद्धांतों और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाना ही असली शक्ति है।
बहादुरी बनाम समझदारी: उन्होंने कहा कि एक खतरनाक और अस्थिर दुनिया में 'बहादुरी' दिखाने के बजाय 'समझदारी' से कदम आगे बढ़ाना ही बुद्धिमानी है।
सलाह: थरूर ने कहा कि यदि वे सरकार को सलाह दे रहे होते, तो वे भी इसी तरह के संयम और संतुलन की बात करते।
कांग्रेस के लिए असहज स्थिति?
पार्टी लाइन से हटकर आए इन बयानों ने कांग्रेस नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। एक तरफ पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं तिवारी और थरूर जैसे वैश्विक समझ रखने वाले नेताओं का समर्थन सरकार के पक्ष को मजबूत कर रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब इन दोनों नेताओं ने विदेश नीति जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राय रखी हो।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा के मुख्य बिंदु
| नेता | प्रमुख तर्क | दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| मनीष तिवारी | तेल, गैस और प्रवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि। | यथार्थवादी (Realistic) |
| शशि थरूर | चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए, संयम ही डिप्लोमेसी है। | कूटनीतिक (Diplomatic) |
| कांग्रेस आधिकारिक | सरकार की विदेश नीति दिशाहीन और कमजोर है। | आलोचनात्मक (Critical) |
निष्कर्ष
मध्य पूर्व के इस ज्वालामुखी के बीच भारत का 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) वाला रुख फिलहाल घरेलू राजनीति में भी बहस का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी नेताओं का यह समर्थन वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को एक 'एकजुट राष्ट्र' के रूप में पेश करने में मदद कर सकता है।





