नई दिल्ली/पटना। बिहार में महीनों से लंबित कैबिनेट विस्तार की गुत्थी आखिरकार सुलझती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से हुई निर्णायक मुलाकात के बाद नई कैबिनेट के स्वरूप पर अंतिम मुहर लग गई है। सूत्रों के मुताबिक, एनडीए के दो बड़े घटकों—भाजपा और जेडीयू—के बीच बराबरी की हिस्सेदारी का फॉर्मूला तय हुआ है।
कैबिनेट का नया फॉर्मूला: 15-15 की हिस्सेदारी
काफी विचार-विमर्श के बाद सत्ता के बंटवारे का जो फॉर्मूला उभरकर सामने आया है, उसके अनुसार:
BJP और JDU: दोनों पार्टियों के कोटे से 15-15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। (इसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हैं)।
सहयोगी दलों को जगह: चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास), जीतन राम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो (RLM) को भी कैबिनेट में सम्मानजनक स्थान दिया जाएगा।
कुल संख्या: बिहार कैबिनेट में अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत केवल कुछ ही मंत्री पदभार संभाल रहे हैं, जिससे एक-एक मंत्री के पास 25 से 30 विभागों का बोझ है।
सम्राट चौधरी की 'मिशन दिल्ली' बैठकें
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली प्रवास के दौरान केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं साधे, बल्कि बिहार के विकास का खाका भी खींचा:
अमित शाह से मुलाकात: मंत्रिमंडल की अंतिम सूची पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि इस बार कुछ पुराने चेहरों की छुट्टी हो सकती है और महिलाओं व युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनाथ सिंह से भेंट: सम्राट चौधरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर “विकसित बिहार” के विजन पर मार्गदर्शन लिया। उन्होंने रेल मंत्री से भी मुलाकात कर राज्य की लंबित परियोजनाओं पर चर्चा की।
कब होगा शपथ ग्रहण?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार का समय रणनीतिक रूप से तय किया गया है:
बंगाल चुनाव का असर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को आने हैं। माना जा रहा है कि इसके तुरंत बाद, संभवतः 6 मई को पटना में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।
नीतीश-सम्राट समन्वय: दिल्ली रवाना होने से पहले सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की थी, जिससे साफ है कि गठबंधन के भीतर पूरी तरह समन्वय बना हुआ है।
विपक्ष का तंज
कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी को लेकर विपक्ष ने निशाना साधा है। आरजेडी नेताओं का कहना है कि राज्य में 'दो पावर सेंटर' बन गए हैं और मुख्यमंत्री को हर छोटे फैसले के लिए दिल्ली या नीतीश कुमार की ओर देखना पड़ रहा है, जिससे शासन प्रभावित हो रहा है।
निष्कर्ष: नई कैबिनेट के गठन के साथ ही बिहार में शासन की गति तेज होने की उम्मीद है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली यह पहली पूर्ण कैबिनेट होगी, जिस पर 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में बड़े प्रशासनिक सुधार और विकास कार्यों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी होगी।





