नई दिल्ली:

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा लोकसभा में दिए गए एक बयान को लेकर देश का शिक्षा और वैज्ञानिक जगत स्तब्ध है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को कथित रूप से 'गोमूत्र एक्सपर्ट' कहे जाने से आहत देशभर के 215 प्रमुख शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र (ओपन लेटर) भेजकर अपनी गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की है।

शिक्षाविदों का कहना है कि चाहे यह टिप्पणी किसी राजनीतिक बयानबाजी के तहत की गई हो या हल्के-फुल्के अंदाज में, यह देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक की दशकों की निष्ठा और अकादमिक उपलब्धियों को न केवल खारिज करती है, बल्कि देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी कमजोर करती है।

"अपमानजनक लेबल के बजाय तर्कों और सबूतों पर हो बहस"

तीन पन्नों के इस खुले पत्र में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपतियों, प्रोफेसरों और वैज्ञानिकों ने लिखा है, "किसी विद्वान के विचारों और तर्कों पर गंभीरता से चर्चा करने के बजाय उन पर व्यक्तिगत या अपमानजनक लेबल चिपका देना अनुचित है। हमारे संविधान ने हर नागरिक में जिस वैज्ञानिक सोच को विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी है, इस तरह की भाषा उसे आघात पहुँचाती है।"

पत्र में आगे कहा गया है कि देश के वैज्ञानिकों और शिक्षकों को यह विश्वास होना चाहिए कि वे किसी भी सार्वजनिक बहस या नीतिगत चर्चा में बिना किसी व्यक्तिगत अपमान के भय के भाग ले सकते हैं। "उनके विचारों की आलोचना कीजिए, उनके सबूतों को चुनौती दीजिए, लेकिन केवल राजनीतिक लाभ के लिए उनकी विद्वता और योगदान को कम मत आंकिए।"

प्रो. कामाकोटी: भारत की तकनीकी क्रांति के एक प्रमुख शिल्पकार

शिक्षाविदों ने अपने पत्र में प्रोफेसर वी. कामाकोटी के बहुमूल्य योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि वे देश के सबसे अग्रणी तकनीकी दिमागों में से एक हैं:

अकादमिक पृष्ठभूमि: उन्होंने IIT मद्रास से ही कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में MS और Ph.D. की उपाधि प्राप्त की है।

अनुसंधान एवं परियोजनाएं: उनके नाम 150 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर दर्ज हैं और वे 50 से ज्यादा महत्वपूर्ण R&D (अनुसंधान एवं विकास) प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर चुके हैं।

स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर: भारत के पहले इंडस्ट्री-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर (SHAKTI) के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका रही है।

प्रतिष्ठित सम्मान: वे डीआरडीओ (DRDO) एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड और टेक्नो विजनरी अवॉर्ड जैसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं।

क्या था मामला?

संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने संबोधन में एक टिप्पणी की थी। यद्यपि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके वक्तव्य के संकेतों को स्पष्ट रूप से प्रो. कामाकोटी से जोड़कर देखा गया।

इस घटनाक्रम के बाद से ही शिक्षा जगत में स्वायत्तता, अकादमिक सम्मान और सार्वजनिक बहसों के गिरते स्तर को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। शिक्षाविदों का मानना है कि ऐतिहासिक रूप से कई नए विचारों की शुरुआत में आलोचना हुई है, लेकिन किसी संस्थान के प्रमुख और वैज्ञानिक का सार्वजनिक मंच से उपहास उड़ाना भारत के शोध और अकादमिक माहौल के लिए चिंताजनक संकेत है।