नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की आसमान छूती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोला। सरकार की आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए खरगे ने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार आम जनता को केवल 'टैक्स और वसूली का जरिया' मान रही है।

आंकड़ों की जुबानी, खरगे का सरकार पर वार

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों और भारत में मिल रहे पेट्रोल-डीजल के दामों की तुलना की। उन्होंने आंकड़ों के जरिए सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए:

परिस्थिति / समयकच्चे तेल की कीमत (प्रति बैरल)पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर)डीजल की कीमत (प्रति लीटर)
पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान$138₹94.77₹87.67
वर्तमान स्थिति (अब)$70.71₹102.12₹95.20

खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लगभग आधा हो चुका है, तब देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ा दी गई हैं।

"परिस्थितियां सामान्य, फिर राहत से परहेज क्यों?"

मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतों में इतनी उल्लेखनीय गिरावट आई है, तो सरकार इसका सीधा फायदा देश के उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दे रही है?

उन्होंने आरोप लगाया कि:

कमर्शियल एलपीजी: पश्चिम एशिया संकट का बहाना बनाकर वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम दोगुने कर दिए गए थे, लेकिन आपूर्ति सामान्य होने के बाद भी कीमतें कम नहीं की गईं।

घरेलू और सीएनजी पर मार: घरेलू रसोई गैस, प्रवासी मजदूरों के काम आने वाले 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर और सीएनजी की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी करके गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ी जा रही है।

जनता सिर्फ 'वसूली का जरिया': कांग्रेस

सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान का समापन बेहद तीखे शब्दों में किया। उन्होंने कहा:

"जब कच्चा तेल महंगा था, तब भी जनता ने उसका बोझ उठाया और अब कच्चा तेल सस्ता है, तब भी जनता ही इसकी भारी कीमत चुका रही है। भाजपा के लिए देश की जनता केवल टैक्स और वसूली का जरिया बनकर रह गई है।"

कांग्रेस ने मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की घटी हुई कीमतों का लाभ तुरंत देश के नागरिकों को दिया जाए और पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के दामों में कटौती की जाए।