नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर उन्होंने देश की जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक भावुक और संकल्पित पोस्ट साझा की। राहुल गांधी ने लिखा, "सफर लंबा है, पर संकल्प वही, आपके लिए हर लड़ाई लड़ता रहूंगा।"
बता दें कि राहुल गांधी ने 26 जून, 2024 को 18वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर पदभार ग्रहण किया था। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से सांसद हैं।
"आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत"
दो साल पूरे होने पर जनता का आभार व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा:
"लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए। इन दो सालों का हर दिन एक ही काम रहा – हर भारतीय की आवाज को सत्ता तक पहुंचाना। NEET के छात्रों की लड़ाई हो, वोट चोरी का पर्दाफाश हो या संविधान की रक्षा, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा रहा, आज भी हूं, हमेशा रहूंगा। सड़क से संसद तक, आपका भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।"
10 साल बाद देश को मिला नेता प्रतिपक्ष: ऐतिहासिक संदर्भ
साल 2014 से 2024 तक, यानी लगभग 10 सालों तक लोकसभा में 'नेता प्रतिपक्ष' का पद खाली रहा था। नियम के मुताबिक, इस पद के लिए किसी भी विपक्षी दल के पास कुल लोकसभा सीटों का कम से कम 10% (यानी 55 सीटें) होना अनिवार्य है। पिछले दो आम चुनावों में कोई भी विपक्षी दल इस आंकड़े को नहीं छू सका था।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने ज़ोरदार वापसी की। कांग्रेस ने 2019 की अपनी 52 सीटों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 सीटों का आंकड़ा छुआ, जिसके बाद राहुल गांधी की इस पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ।
चुनावी सफर और कैबिनेट मंत्री का दर्जा
वायनाड छोड़ रायबरेली को चुना: 2024 के आम चुनाव में राहुल गांधी ने केरल की वायनाड और उत्तर प्रदेश की रायबरेली, दोनों सीटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने रायबरेली सीट को अपने पास रखने का फैसला किया। उनकी छोड़ी हुई वायनाड सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाशिन ने जीत हासिल की।
कैबिनेट मंत्री के समान सुविधाएं: 'संसद में विपक्ष के नेता की सैलरी और अलाउंस एक्ट, 1977' के तहत नेता प्रतिपक्ष को कानूनी मान्यता प्राप्त है। इस नाते राहुल गांधी को एक कैबिनेट मंत्री के बराबर वेतन, भत्ते और अन्य सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।
संसद के भीतर सरकार की नीतियों को आक्रामक तरीके से घेरने और जनहित के मुद्दों को पुरज़ोर ढंग से उठाने के कारण, नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी का यह दो साल का कार्यकाल लगातार सुर्खियों में बना रहा है





