नई दिल्ली,

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट सामने आने के बाद देश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में आई गिरावट को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर चौतरफा हमला बोला। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख और प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है।

'पीएम मोदी के दावों में दम नहीं'

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 के एक पुराने बयान को याद दिलाते हुए घेरा। उस वक्त पीएम मोदी ने दावा किया था कि विदेश यात्रा करने वाले और वहां रहने वाले भारतीय आज अपने पासपोर्ट की ताकत और सम्मान को अच्छी तरह महसूस करते हैं।

इस पर तंज कसते हुए खरगे ने कहा:

"प्रधानमंत्री का वह दावा और ताकत आखिर आज कहां दिखाई दे रही है? जमीनी तथ्य और आंकड़े उनके दावों की पूरी तरह पोल खोलते हैं। मोदी सरकार की नीतियां देश की वैश्विक प्रतिष्ठा को मटियामेट करने के लिए जिम्मेदार हैं।"

आंकड़ों के चक्रव्यूह में घिरी सरकार

कांग्रेस अध्यक्ष ने वैश्विक पासपोर्ट सूचकांकों के हवाले से सरकार को कटघरे में खड़ा किया:

रैंकिंग में गिरावट: एक वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग के अनुसार, भारत साल 2013 में 74वें स्थान पर था, जो जून 2026 में खिसककर 80वें स्थान पर पहुंच गया है।

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026: ताजा सूचकांक में भारत पिछले साल के 124वें पायदान से एक अंक और नीचे गिरकर 125वें स्थान पर आ गया है।

वीजा-फ्री एंट्री की सीमा: इस रैंकिंग के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट धारक अब महज 26 देशों में बिना वीजा (Visa-Free) के यात्रा कर सकते हैं।

वैश्विक तुलना: इस सूची में भारत अब फिलीपींस, मोरक्को, उज्बेकिस्तान और चीन जैसे देशों से भी पीछे छूट गया है, हालांकि अजरबैजान और किर्गिस्तान से आगे है। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान को इस इंडेक्स में 188वां स्थान मिला है।

पासपोर्ट बनवाना हुआ बेहद महंगा

खरगे ने आम जनता से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सेवाओं के स्तर में सुधार करने के बजाय सरकार ने पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया को और अधिक खर्चीला बना दिया है।

सामान्य पासपोर्ट शुल्क को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है।

तत्काल (Tatkal) सेवा का शुल्क अब बढ़कर 5,000 रुपये तक पहुंच चुका है।

विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी कमी

पर्यटन क्षेत्र की सुस्ती पर सवाल उठाते हुए खरगे ने कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा अभी भी कोरोना महामारी (Pre-COVID) के दौर से उबर नहीं पाया है।

साल 2019 में भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या 10.93 मिलियन थी, जो साल 2024 में घटकर 9.95 मिलियन रह गई।

खरगे ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए पूछा, "क्या मोदी सरकार इस बड़ी विफलता को छिपाने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRIs) के आगमन के आंकड़ों को विदेशी पर्यटकों के डेटा में मिलाकर देश को गुमराह कर रही है?"

फिलहाल, कांग्रेस अध्यक्ष के इन गंभीर आरोपों पर सत्तापक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।