नई दिल्ली:
भारतीय कर व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए माल एवं सेवा कर (GST) परिषद ने दरों में बदलाव की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व स्थिर बनाने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल अब टैक्स रेट्स में बदलाव के किसी भी प्रस्ताव पर साल में केवल एक बार ही विचार करेगी। इसके अलावा, दरों में किए जाने वाले सभी संशोधन नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से ही लागू किए जाएंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को होने वाली 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक के एजेंडे में टैक्स दरों में किसी भी तरह का बदलाव शामिल नहीं है।
कारोबारियों को मिलेगी टैक्स स्थिरता
सूत्रों का कहना है कि उद्योगों और व्यापारियों के लिए किसी तात्कालिक रियायत से अधिक टैक्स दरों की निश्चितता (Certainty) और स्थिरता मायने रखती है।
- दीर्घकालिक योजना: स्थिर कर व्यवस्था से कंपनियों को पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की रूपरेखा तैयार करने और लंबी अवधि के अनुबंधों की सटीक कीमत तय करने में आसानी होती है।
- सीमित मुद्दों पर चर्चा: आगामी बैठक में केवल टैक्स से जुड़ी अस्पष्टताओं को दूर करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे सीमित विषयों पर विचार किया जाएगा।
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ई-कॉमर्स पर लागू हो सकती है 5% एकल दर
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से की जाने वाली आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के बिना 5 प्रतिशत की एकल (Flat) जीएसटी दर लागू की जा सकती है।
पुनर्गठित जीएसटी व्यवस्था का सकारात्मक असर
पिछले साल जीएसटी दरों और स्लैब का पुनर्गठन कर 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार स्लैब के स्थान पर मुख्यतः दो-दर (5% और 18%) व्यवस्था को अपनाया गया था। वित्त मंत्रालय के अनुसार:
- इस बदलाव से उपभोक्ता खपत को भारी बढ़ावा मिला है।
- चालू वर्ष में जून महीने से लगातार मासिक जीएसटी संग्रह में दहाई अंक (Double-digit) की मजबूत वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
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