चंडीगढ़/दिल्ली: हरियाणा राज्यसभा चुनाव में हुई 'भितरघात' के बाद कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई विधायक दल की बैठक में साफ कर दिया गया है कि पार्टी के साथ 'गद्दारी' करने वालों के लिए अब संगठन में कोई जगह नहीं है।
अनुशासन की चाबुक: इन 5 विधायकों पर गिरेगी बिजली
कांग्रेस ने उन पांच विधायकों को पार्टी से निष्कासित करने का मन बना लिया है, जिन पर क्रॉस वोटिंग का आरोप है। इनमें शामिल हैं:
जरनैल सिंह (रतिया)
मोहम्मद इलियास (पुन्हाना)
मोहम्मद इसराइल (हथीन)
शैली चौधरी (नारायणगढ़)
रेणुबाला (सढ़ोरा)
हालांकि ये विधायक आरोपों को खारिज कर रहे हैं, लेकिन पार्टी की अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक ने 3 अप्रैल को चंडीगढ़ में अहम बैठक बुलाई है, जिसमें इनके भाग्य का अंतिम फैसला होगा।
4 विधायकों को राहत; रिटर्निंग अधिकारी पर फोड़ा ठीकरा
हैरानी की बात यह है कि पार्टी ने उन चार विधायकों को 'क्लीन चिट' दे दी है जिनके वोट रद्द हुए थे। कांग्रेस का तर्क है कि इसके लिए विधायक नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी जिम्मेदार हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो यहाँ तक चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो नवनिर्वाचित सांसद कर्मवीर बौद्ध हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
विधायकी रद्द कराने की 'फिल्डिंग'
पार्टी केवल निष्कासन तक सीमित नहीं रहना चाहती। कांग्रेस की योजना इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्म कराने की है।
रणनीति: चूँकि राज्यसभा चुनाव में दल-बदल कानून सीधे लागू नहीं होता, इसलिए पार्टी इन्हें निष्कासित कर 'असंबद्ध' (Unattached) सदस्य बनवाएगी।
व्हिप का दांव: भविष्य में विधानसभा के किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर 'व्हिप' जारी किया जाएगा। यदि ये पांचों विधायक उसे नहीं मानते, तो स्पीकर के माध्यम से इनकी सदस्यता रद्द कराई जाएगी।
गुटबाजी की बू और आरोपों का दौर
कार्रवाई की इस जद में आने वाले विधायक अलग-अलग खेमों से हैं। तीन विधायक हुड्डा गुट के हैं, जबकि दो (शैली चौधरी और रेणुबाला) कुमारी सैलजा खेमे की मानी जाती हैं। विधायक शैली चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में गुट और चेहरे देखकर विरोधियों को ठिकाने लगाया जा रहा है।
अध्यक्ष का बयान: हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, "पार्टी के गद्दारों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई भविष्य के लिए एक नजीर बनेगी।"
अगला कदम: अब सबकी नजरें 3 अप्रैल की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ कांग्रेस अपनी अनुशासन की लक्ष्मण रेखा खींचने की तैयारी में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कार्रवाई पार्टी को एकजुट करेगी या अंतर्कलह को और हवा देगी।





