चंडीगढ़ / नई दिल्ली हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुआ मुकाबला किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं रहा। सोमवार शाम से शुरू हुआ कशमकश का दौर मंगलवार तड़के 3 बजे तक चला, जिसमें अंततः बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध विजयी घोषित किए गए। जहाँ बीजेपी की एक सीट पक्की थी, वहीं दूसरी सीट पर कांग्रेस ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को बेहद मामूली अंतर से हराकर जीत हासिल की।
जीत का अंकगणित: कैसे पलटा पासा?
चुनाव में कुल 90 विधायकों में से 83 के वोट वैध (Valid) माने गए। जीत के लिए निर्धारित वोट वैल्यू 2767 थी।
| उम्मीदवार | पार्टी/समर्थन | प्राप्त वोट वैल्यू | परिणाम |
|---|---|---|---|
| संजय भाटिया | बीजेपी | 3900 | विजयी |
| कर्मवीर बौद्ध | कांग्रेस | 2800 | विजयी |
| सतीश नांदल | निर्दलीय (बीजेपी समर्थित) | 2733.33 | पराजित |
जीत का बारीक अंतर: कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध मात्र 33 वोट वैल्यू के अंतर से जीते। यदि इनेलो (INLD) के दो विधायकों ने मतदान का बहिष्कार न किया होता, तो परिणाम निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में जा सकता था।
क्रॉस वोटिंग और 'बंधक' की राजनीति
इस चुनाव में कूटनीति और शिकायतों का बोलबाला रहा। कांग्रेस के 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को वोट दिया, जिससे कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कड़ा रुख: पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने इसे 'धोखा' करार देते हुए कहा कि पार्टी गद्दारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
बीजेपी का आरोप: मुख्यमंत्री नायब सैनी और संजय भाटिया ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को 'बंधक' बनाकर रखा और उन्हें डरा-धमकाकर वोट लिया।
कांग्रेस के लिए 'संजीवनी' और राहुल गांधी की रणनीति
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीत हरियाणा कांग्रेस के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले दो राज्यसभा चुनावों में उसे हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस नेताओं ने इसे राहुल गांधी द्वारा दलित भाईचारे के सम्मान की जीत बताया। कर्मवीर बौद्ध, जो एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में उभरे, उन्होंने अपनी जीत का श्रेय नेतृत्व की समावेशी सोच को दिया।
हाई-वोल्टेज ड्रामा: शाम 5 से सुबह 3 बजे तक
मतगणना के दौरान भारी विवाद की स्थिति बनी। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने एक-दूसरे के विधायकों पर 'वोट की गोपनीयता' (Secrecy) भंग करने का आरोप लगाया।
बीजेपी ने कांग्रेस के दो विधायकों की शिकायत की।
कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट पर आपत्ति जताई।
चुनाव आयोग से हरी झंडी मिलने के बाद रात 10:30 बजे गिनती शुरू हो सकी।
निष्कर्ष
बीजेपी निर्दलीय उम्मीदवार के सहारे 'जीत की हैट्रिक' लगाने से चूक गई, जबकि कांग्रेस ने अपनी अंदरूनी गुटबाजी के बावजूद एक महत्वपूर्ण सीट बचा ली। हालांकि, 5 विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस की भावी चुनौतियों को भी स्पष्ट कर दिया है।





