चंडीगढ़ | हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। आगामी 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले कांग्रेस ने अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' का सहारा लिया है। क्रास वोटिंग की किसी भी आशंका को टालने के लिए पार्टी के 31 विधायकों को सुरक्षित रूप से पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के कूफरी शिफ्ट कर दिया गया है।

कूफरी में 'पाठशाला' और सुक्खू की मेजबानी

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की देखरेख में इन विधायकों को शिमला के निकट कूफरी के एक रिजॉर्ट में ठहराया गया है। विधायकों के साथ हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और सांसद दीपेंद्र हुड्डा भी मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि यहाँ विधायकों को न केवल एकजुट रखा जाएगा, बल्कि मतदान की बारीकियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि तकनीकी गलती से कोई वोट रद्द न हो।

हुड्डा समेत 6 विधायक हरियाणा में ही मौजूद

दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत 6 विधायक इस यात्रा पर नहीं गए हैं। इसके पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं:

भूपेंद्र सिंह हुड्डा: केंद्रीय पर्यवेक्षक होने के नाते पूरी चुनावी कमान संभाल रहे हैं।

कुलदीप वत्स: परिवार में विवाह समारोह के कारण रुके हैं।

विनेश फोगाट और चंद्रमोहन: निजी कारणों से साथ नहीं गए।

मोहम्मद इलियास और परमवीर सिंह: स्वास्थ्य कारणों और अधिक आयु की वजह से चंडीगढ़ में ही हैं।

"विधायकों का साथ जाना केवल मनोबल बढ़ाने और रणनीति साझा करने का हिस्सा है। हमारे सभी विधायक एकजुट हैं और कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत निश्चित है।" — बीबी बत्रा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता

साख की लड़ाई: अतीत के जख्म और वर्तमान चुनौती

कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख का सवाल बन गया है। पिछले रिकॉर्ड पार्टी के पक्ष में नहीं रहे हैं:

2016 का 'स्याही कांड': 14 वोट रद्द होने के कारण सुभाष चंद्रा जीते थे।

2022 की हार: कार्तिकेय शर्मा ने क्रास वोटिंग के सहारे अजय माकन को शिकस्त दी थी।

इस बार भी मुकाबला रोचक है। जहाँ भाजपा के संजय भाटिया की जीत तय मानी जा रही है, वहीं दूसरी सीट पर कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के बीच कांटे की टक्कर है।

आंकड़ों का खेल: क्या कहता है समीकरण?

90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में जीत के लिए गणित कुछ इस प्रकार है:

पक्षविधायक संख्यासमर्थन/स्थिति
भाजपा483 निर्दलीय विधायकों का भी साथ
कांग्रेस37एकजुट रहने पर एक सीट पक्की
इनेलो02निर्णायक भूमिका में हो सकते हैं

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जीत का भरोसा जताते हुए कहा है कि एक सीट कांग्रेस की झोली में ही आएगी और भाजपा को तय करना है कि वह अपने दो उम्मीदवारों में से किसे जिताना चाहती है। सभी विधायक 16 मार्च की सुबह सीधे मतदान के लिए चंडीगढ़ लौटेंगे।