पटना। बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अब एक बेहद हाई-प्रोफाइल और दिलचस्प मोड़ ले लिया है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) खुद इस बार चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं।

रविवार को हुई जन सुराज की कोर कमेटी की हाई-लेवल बैठक में प्रशांत किशोर के नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी गई। इसके तुरंत बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेतृत्व ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए पीके को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस एलान के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रहे कयासों पर विराम लग गया है।

बीजेपी के 'अजेय गढ़' में प्रशांत किशोर की एंट्री

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अभेद्य किला रही है। इस सीट पर लगातार पांच बार से भाजपा के दिग्गज नेता नितिन नवीन जीत दर्ज करते आ रहे हैं। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर अब उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने से यह मुकाबला सीधे तौर पर बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है। भाजपा जहाँ अपने इस परंपरागत गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी, वहीं जन सुराज के लिए यह साख की लड़ाई बन चुकी है।

महागठबंधन का मिल सकता है साथ, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

बांकीपुर की जंग केवल दोतरफा नहीं रह गई है। तेज प्रताप यादव की पार्टी जेजेडी (JJD) ने इस सीट पर पहले ही वीणा मानवी को अपना उम्मीदवार बनाकर अपनी दावेदारी ठोक दी है। इसी बीच राजनीतिक गलियारों से बड़ी खबर यह भी आ रही है कि महागठबंधन इस सीट पर प्रशांत किशोर को अपना समर्थन दे सकता है। यदि ऐसा होता है, तो बांकीपुर की चुनावी बिसात पूरी तरह बदल जाएगी।

वैकल्पिक राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के उम्मीदवार बनने से यह चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। जन सुराज इस चुनाव को केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार में अपनी 'वैकल्पिक राजनीति' और सांगठनिक ताकत की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देख रही है। इस चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि बिहार की भविष्य की राजनीति किस करवट बैठेगी।

चुनावी महासंग्राम का शेड्यूल:

मतदान की तारीख: 30 जुलाई

नतीजों का एलान: 3 अगस्त

अब सभी की नजरें 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जहाँ बांकीपुर की जनता यह तय करेगी कि क्या वे बीजेपी के पुराने भरोसे के साथ जाएंगे या प्रशांत किशोर के 'जन सुराज' मॉडल पर मुहर लगाएंगे।