नई दिल्ली | बजट सत्र 2026 संसद के बजट सत्र के तीसरे दिन लोकसभा का माहौल उस समय गरमा गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भाजपा के वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बहस का केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाया गया एक गंभीर आरोप और संसदीय मर्यादाओं की दुहाई रही।
राहुल गांधी का आरोप: "पीएम ने किया समझौता"
सदन की कार्यवाही के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्पीकर की भूमिका पर चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष पर उन्हें बोलने से रोकने का आरोप लगाया।
अभिव्यक्ति की आजादी: राहुल गांधी ने कहा, "यह सदन किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन विडंबना यह है कि जब भी मैं बोलने के लिए खड़ा होता हूं, मुझे रोक दिया जाता है।"
पुराना मुद्दा: उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली बार उन्होंने पीएम द्वारा किए गए 'समझौतों' को लेकर सवाल उठाए थे, जिस पर उन्हें उचित जवाब नहीं मिला।
रविशंकर प्रसाद का करारा जवाब: "पीएम कभी समझौता नहीं करते"
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने तुरंत मोर्चा संभाला और कड़े शब्दों में पलटवार किया।
राष्ट्रीय अस्मिता: प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं विपक्ष के नेता को याद दिलाना चाहता हूँ कि भारत के प्रधानमंत्री कभी समझौता नहीं कर सकते।"
इतिहास का हवाला: उन्होंने यूपीए शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को तत्कालीन स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने बोलने नहीं दिया था, जिसके विरोध में भाजपा ने वॉकआउट किया था।
मर्यादा की सीख: रविशंकर प्रसाद ने संसदीय प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपने शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।
बहस के मुख्य बिंदु
| पक्ष | मुख्य तर्क/आरोप |
|---|---|
| राहुल गांधी (विपक्ष) | सदन में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है; पीएम के 'समझौतों' पर सवाल। |
| रविशंकर प्रसाद (सत्ता पक्ष) | पीएम की छवि पर आंच बर्दाश्त नहीं; विपक्ष को संसदीय इतिहास और मर्यादा का ज्ञान होना चाहिए। |
सदन में तनाव का माहौल
लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शुरू हुई यह बहस व्यक्तिगत और ऐतिहासिक आरोपों तक जा पहुंची। रविशंकर प्रसाद ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है, जबकि राहुल गांधी ने इसे जनता की अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश करार दिया।





