चेन्नई/नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक ऐसा मोड़ आया है जिसने न केवल गठबंधन के समीकरणों को हिला दिया है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी एक बड़ा विद्रोह पैदा कर दिया है। दशकों पुराने सहयोगी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) को समर्थन देने के कांग्रेस आलाकमान के फैसले ने पार्टी के भीतर ही तीखी बहस छेड़ दी है।
"राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है" – मणिशंकर अय्यर
कांग्रेस के दिग्गज और वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अपनी ही पार्टी के इस कदम पर कड़ा प्रहार किया है। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने इस फैसले को "घटिया राजनीतिक अवसरवादिता" करार दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस कदम से राज्य में सांप्रदायिक ताकतों (BJP) को पिछले दरवाजे से प्रवेश मिलता है, तो यह भारतीय राजनीति के इतिहास का सबसे बुरा 'ऑन गोल' (Self Goal) साबित होगा।
नैतिकता बनाम चाणक्य नीति
अय्यर ने 'द हिंदू तमिल' में लिखे अपने लेख में पार्टी के आदर्शों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस फैसले में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की। उन्होंने कहा:
"यह महात्मा गांधी के 1925 के उस सिद्धांत का अक्षम्य उल्लंघन है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वराज नैतिकता पर आधारित होना चाहिए। मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि कांग्रेस के संस्थापक ऐसी सुविधावादी राजनीति को आशीर्वाद देंगे।"
गठबंधन की जीत, पर साथी का त्याग
अय्यर ने तथ्यों के साथ तर्क दिया कि कांग्रेस ने जो 5 सीटें जीती हैं, वे DMK के साथ दशकों पुराने मजबूत गठबंधन की बदौलत मिली हैं। उन्होंने अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुथुराई का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की जनता ने स्पष्ट रूप से TVK के खिलाफ और DMK गठबंधन के पक्ष में मतदान किया था। ऐसे में जनादेश के विपरीत जाकर नया साथी चुनना समझ से परे है।
मुख्य बिंदु: अय्यर की नाराजगी के बड़े कारण
अचानक हृदय परिवर्तन: 4 मई तक जिस TVK को कांग्रेस ठुकरा रही थी, चुनाव बाद उसी से हाथ मिलाना नैतिकता के खिलाफ है।
सहयोगी का अपमान: दशकों तक साथ निभाने वाले परखे हुए सहयोगी (DMK) को बिना किसी ठोस कारण के छोड़ना राजनीतिक अदूरदर्शिता है।
नेहरूवादी दृष्टिकोण: अय्यर के अनुसार, यथार्थवादी जवाहरलाल नेहरू भी ऐसे जोखिम भरे और अस्थिर फैसले पर संदेह व्यक्त करते।
निष्कर्ष: तमिलनाडु में सत्ता की बिसात पर कांग्रेस ने जो नई चाल चली है, उसने विजय की TVK को तो संजीवनी दे दी है, लेकिन पार्टी के अपने ही 'चाणक्य' अब इस फैसले को 'गांधी की कांग्रेस' की राह से भटका हुआ मान रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह नया गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में कोई नया कीर्तिमान रचेगा या कांग्रेस के लिए अंदरूनी कलह का कारण बनेगा।





