नई दिल्ली:
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (बीमा वितरण प्रणाली) में प्रस्तावित बड़े बदलावों को लेकर उद्योग जगत में गहरी चिंता फैल गई है। इंश्योरेंस ब्रोकर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IBAI) ने मंगलवार को चेतावनी दी कि नियामक के इन प्रस्तावों से मध्यस्थों (ब्रोकरेज फर्मों) की आय में 60 से 70 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है और इस क्षेत्र से जुड़ी 10 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है।
800 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले IBAI ने कहा कि इन बदलावों से न केवल ब्रोकरेज फर्मों बल्कि बीमा कंपनियों में भी नौकरियां जा सकती हैं, जिससे देश में बीमा क्षेत्र का दायरा (Insurance Penetration) बढ़ाने के दीर्घकालिक लक्ष्यों को बड़ा झटका लगेगा।
क्या है 23 सितंबर का परामर्श पत्र?
IRDAI ने 23 सितंबर को "रीकैलिब्रेटिंग इकॉनमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन" शीर्षक से एक व्यापक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है।
इस परामर्श पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित सुधारों का ढांचा तैयार किया गया है:
- बीमा वितरण और संरचना में बदलाव: उत्पादों के वितरण और बिक्री के तरीकों को पुनर्गठित करना।
- कमीशन और खर्च पर नियंत्रण: बीमा कंपनियों और मध्यस्थों द्वारा लिए जाने वाले अत्यधिक कमीशन और परिचालन खर्चों को सीमित करना।
- पारदर्शिता व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: बाजार आचरण में सुधार लाना और डिजिटल ढांचे के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
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"सुझाव का समय कम, दो महीने बढ़े समयसीमा" — IBAI
IBAI के निदेशक पवनजीत सिंह ढींगरा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्तावित सुधारों का असर बेहद व्यापक और नकारात्मक हो सकता है। उन्होंने कहा:
"प्रस्तावित बदलावों से उद्योग की आय 70 प्रतिशत तक घट जाएगी और करीब 10 लाख लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा। नियामक ने इस नीति पर उद्योग से सुझाव मांगने के लिए जो समय तय किया है, वह बेहद कम है। इसे कम से कम दो महीने बढ़ाकर इस साल दिसंबर तक किया जाना चाहिए।"
IRDAI अध्यक्ष का रुख और आगे की रणनीति
दूसरी ओर, परामर्श पत्र जारी होने के बाद IRDAI के प्रमुख अजय सेठ ने विनियामक के इस कदम का पुरजोर बचाव किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों द्वारा लिया जाने वाला अत्यधिक कमीशन ग्राहकों के हित में नहीं है और इसमें सुधार जरूरी है।
हालांकि, IBAI अधिकारियों ने कहा कि वे नियामक के मूल उद्देश्यों से असहमत नहीं हैं, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए वे शुक्रवार को IRDAI के साथ होने वाली बैठक में अपनी चिंताओं को विस्तार से रखेंगे।
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