हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें अचानक तेज हो गई हैं। इस सियासी चर्चा को हवा दी है निजामाबाद से भाजपा सांसद धर्मपुरी अरविंद के एक चौंकाने वाले दावे ने, जिसमें उन्होंने कहा है कि रेवंत रेड्डी आने वाले दिनों में तेलंगाना के 'शुभेंदु अधिकारी' साबित हो सकते हैं।

'बंगाल जैसा दल-बदल दोहराएंगे रेवंत'

भाजपा सांसद धर्मपुरी अरविंद ने दावा किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी बहुत जल्द राजनीतिक पाला बदल सकते हैं। उन्होंने इतिहास दोहराने की बात कहते हुए कहा:

"रेवंत रेड्डी ठीक उसी तरह पाला बदलेंगे, जैसे छह साल पहले पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल होकर किया था।"

अरविंद ने कांग्रेस आलाकमान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को नजरअंदाज करके रेवंत रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाया, जो उसकी बड़ी भूल है। उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तेलंगाना में करारी हार का सामना करना पड़ेगा।

पीएम मोदी के उस बयान ने बढ़ाई धड़कनें

दरअसल, इन कयासों और दावों को हवा हवा में नहीं मिल रही है। इसकी पटकथा कुछ दिनों पहले हैदराबाद के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ही लिख दी गई थी।

मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी एक साथ मौजूद थे। उसी दौरान पीएम मोदी ने तेलंगाना के सीएम की तरफ इशारा करते हुए एक बेहद दिलचस्प और रहस्यमयी टिप्पणी की थी। पीएम मोदी ने कहा था:

"आप जहां पहुंचना चाहते हैं, वहां नहीं पहुंच पाएंगे। अच्छा है कि मुझसे ही जुड़ें।"

प्रधानमंत्री की इसी 'मुझसे ही जुड़ें' वाली टिप्पणी के बाद से ही कयासों का दौर शुरू हो गया था, जिसे अब भाजपा सांसद के बयान ने और पुख्ता कर दिया है।

क्या हैं इसके सियासी मायने?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण भारत में पैर पसारने की कोशिश में जुटी भाजपा के लिए तेलंगाना बेहद अहम राज्य है। अगर इन दावों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में एक बहुत बड़ा झटका हो सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी या कांग्रेस आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन तेलंगाना की सियासत में 'पर्दे के पीछे' कुछ बड़ा पकने के संकेत जरूर मिल रहे हैं।