पटना/कोलकाता: बिहार और पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा ने 'सियासी पारा' चढ़ा दिया है। चर्चा है— बिहार के सीमांचल और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने की। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और आरजेडी के दावों के बाद अब केंद्र सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक सफाई सामने आई है।

पप्पू यादव का 'बड़ा खुलासा' या महज 'सियासी शिगूफा'?

विवाद की शुरुआत सांसद पप्पू यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बड़ा 'अंडरग्राउंड खेल' कर रही है। पप्पू यादव के अनुसार:

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की तैयारी है।

बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराकर सीमांचल (बिहार) और मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज, दिनाजपुर (बंगाल) को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा।

उन्होंने नीतीश कुमार को हटाने और सैन्य पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल की नियुक्ति को इसी योजना का हिस्सा बताया।

बीजेपी की सफाई: "तथ्यों से परे है यह बात"

इन चर्चाओं के बीच शनिवार (7 मार्च, 2026) को केंद्रीय मंत्री और सांसद नित्यानंद राय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया:

"बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे है। जनता पप्पू यादव के दावों को गंभीरता से न ले।"

नित्या बाबू को पप्पू का जवाब: "बिना आग के धुआं नहीं उठता"

नित्यानंद राय की सफाई के बाद पप्पू यादव ने एक बार फिर पलटवार किया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि गृह मंत्री का सीमांचल में तीन दिन रुकना और बंगाल-बिहार में खास पृष्ठभूमि वाले राज्यपालों की नियुक्ति संदेह पैदा करती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर यूटी (UT) बनाने की कोशिश हुई, तो हम इसे पूरी गंभीरता से लेंगे और आर्थिक नाकेबंदी करेंगे।"

वोट बैंक की राजनीति या प्रशासनिक जरूरत?

पप्पू यादव से पहले आरजेडी के प्रधान महासचिव रणविजय साहू ने भी इस मुद्दे को हवा दी थी। विपक्ष का मानना है कि इस भौगोलिक बदलाव के जरिए ममता बनर्जी और महागठबंधन के एक बड़े वोट बैंक को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, बीजेपी इसे महज विपक्ष का डर और भ्रामक प्रचार बता रही है। फिलहाल, इस जुबानी जंग ने दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज कर दी है।