श्रीनगर/जम्मू: संसद में पेश होने जा रहे 'परिसीमन बिल 2026' ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस बिल के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के कोटे में संसदीय सीटों की संख्या 19 से बढ़ाकर 35 की जानी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर की मौजूदा 5 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 8 हो सकती है।

संसद की दहलीज पर असली ताकत

कश्मीर मामलों के जानकारों का मानना है कि अब आम कश्मीरी मतदाता यह समझ चुका है कि उसके भाग्य का अंतिम निर्णय विधानसभा में नहीं, बल्कि देश की संसद में होता है।

बढ़ता प्रभाव: सीटों की संख्या बढ़ने का सीधा अर्थ है कि राष्ट्रीय राजनीति में जम्मू-कश्मीर का कद और प्रभाव बढ़ेगा।

ऐतिहासिक उदाहरण: विशेषज्ञ 1998 की उस घटना को याद करते हैं जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज़ के एक वोट ने केंद्र की वाजपेयी सरकार गिरा दी थी। यह मिसाल दर्शाती है कि संसद में एक-एक प्रतिनिधि की क्या अहमियत होती है।

क्षेत्रीय असंतुलन और पारदर्शिता पर सवाल

जहाँ सीटों के बढ़ने का स्वागत हो रहा है, वहीं प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दल आशंकित हैं:

उमर अब्दुल्ला (मुख्यमंत्री): उन्होंने कहा कि परिसीमन होना चाहिए, लेकिन पिछला अनुभव कड़वा रहा है। उनके अनुसार, पिछला परिसीमन 'तर्कहीन और पक्षपातपूर्ण' था, जो केवल भाजपा और उसके सहयोगियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया गया था।

महबूबा मुफ्ती (PDP अध्यक्ष): उन्होंने भी पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि राजौरी-पुंछ को अनंतनाग से जोड़ना और कश्मीर की उपेक्षा करना राजनीतिक लाभ की कोशिश थी। केंद्र को इस बार स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

जम्मू संभाग को लाभ की उम्मीद

संवैधानिक मामलों के जानकारों का तर्क है कि यदि भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक मानकों के आधार पर ईमानदारी से परिसीमन होता है, तो जम्मू प्रांत को बड़ा लाभ होगा।

"आबादी और भूगोल को देखते हुए बढ़नी वाली 3 सीटों में से कम से कम 2 सीटें जम्मू संभाग के खाते में आनी चाहिए। हालांकि यहाँ मांग 7 सीटें बढ़ाने की थी, लेकिन 3 सीटों का बढ़ना भी एक सकारात्मक कदम है।" — एडवोकेट अंकुर शर्मा

केंद्र की रणनीति और विपक्षी रुख

प्रस्तावित बिल में न केवल लोकसभा बल्कि विधानसभा सीटों में भी बढ़ोतरी के संकेत हैं, हालांकि उनकी संख्या पर अभी आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। राजनीतिक गलियारों में अब सबकी नजरें नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख पर टिकी हैं। क्या पार्टी संसद में इस बिल का समर्थन करेगी या इसके विरोध में खड़ी होगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

परिसीमन का संभावित गणित:

मौजूदा लोकसभा सीटें: 5

अनुमानित नई सीटें: 3 (कुल 8 होने की संभावना)

UT कोटा विस्तार: 19 से बढ़ाकर 35 सीटें (पूरे देश के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए)