नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा सोशल मीडिया पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर किए गए एक तीखे पोस्ट ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस मामले में अब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं और उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
चुनाव आयोग का वह पोस्ट जिसने मचाया बवाल
बुधवार को भारतीय चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से TMC को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश जारी किया। आयोग ने लिखा:
"चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक— पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।"
यह पोस्ट उस समय आया है जब TMC का एक प्रतिनिधिमंडल (डेरेक ओ ब्रायन, साकेत गोखले और सागरिका घोष सहित) चुनाव आयोग से मिलकर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था।
केजरीवाल का तीखा प्रहार: 'बीजेपी के अंडर में काम कर रहा आयोग'
अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग के इस पोस्ट को रीट्वीट करते हुए संस्थान की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने लिखा:
निर्देशों का आरोप: "अब ये कहने की भी जरूरत नहीं कि चुनाव आयोग सीधे बीजेपी से निर्देश लेकर और बीजेपी के अंडर में काम कर रहा है। यह अब जग जाहिर है और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
संस्थान की मर्यादा: केजरीवाल ने आगे लिखा, "कम से कम ऐसी भाषा के ट्वीट करके इतने अहम संस्थान की इज्जत तो सरेआम मत उछालिए।"
विवाद की पृष्ठभूमि: 91 लाख वोटरों के नाम हटने का दावा
यह तल्खी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटने की खबरें हैं।
TMC का पक्ष: पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर उनके समर्थकों के नाम काट रहा है, ताकि चुनावों को प्रभावित किया जा सके।
ECI का पक्ष: आयोग का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित कर रहे हैं और 'बूथ जामिंग' जैसी पुरानी प्रथाओं को इस बार सफल नहीं होने देंगे।
बंगाल चुनाव: महत्वपूर्ण तिथियां
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए चुनावी रण तैयार है:
पहला चरण: 23 अप्रैल 2026
दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
परिणाम: 4 मई 2026
संविधान के संरक्षक कहे जाने वाले चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच इस सीधे टकराव ने आगामी चुनावों की पारदर्शिता पर एक नई बहस छेड़ दी है।





