नई दिल्ली: देश की सियासत में इन दिनों भारी फेरबदल का दौर जारी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) इस वक्त अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही हैं। दोनों ही दलों में बड़े पैमाने पर हुई बगावत को लेकर विपक्ष जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हॉर्स-ट्रेडिंग (सांसदों की खरीद-फरोख्त) का आरोप लगा रहा है, वहीं BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे इन पार्टियों के 'नेतृत्व की विफलता' करार दिया है।
NDA को मिल सकता है प्रचंड बहुमत का साथ
विपक्ष की इस आपसी फूट का सीधा फायदा केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिलता दिख रहा है। वर्तमान में लोकसभा में NDA के पास 293 सांसद हैं। यदि TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय करने वाले 20 सांसद और शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसद सत्तापक्ष को समर्थन देते हैं, तो NDA का आंकड़ा 319 तक पहुंच सकता है।
बीजेपी का तीखा हमला: "पार्टी नहीं, जागीर चला रहे थे नेता"
सत्तारूढ़ बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, यह संकट किसी बाहरी उकसावे का नहीं, बल्कि अंदरूनी कमियों का नतीजा है। बीजेपी ने पाला बदलने के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:
राजनीतिक भविष्य की असुरक्षा: नेता अपना और पार्टी का भविष्य अंधकार में देख रहे हैं।
कार्यकर्ताओं से संवादहीनता: शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच की खाई गहरी हो चुकी है।
आर्थिक व अन्य रणनीतिक लाभ।
"एक समय था जब बालासाहेब ठाकरे हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता का ध्यान रखते थे। आज उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर न सिर्फ हिंदुत्व की विचारधारा से विश्वासघात किया, बल्कि कार्यकर्ताओं से भी संपर्क खो दिया।" — बीजेपी के वरिष्ठ नेता
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में बीजेपी नेताओं का कहना है कि बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद विधायकों ने एक तरह से तख्तापलट कर दिया है। TMC को एक 'जागीर' की तरह चलाया जा रहा था, जहाँ चुने हुए प्रतिनिधियों की कोई आवाज नहीं थी।
उद्धव और ममता के गंभीर आरोप
दूसरी तरफ, विपक्षी खेमे में इस बगावत के बाद से खलबली मची हुई है:
उद्धव ठाकरे का वार: शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भावुक होते हुए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकसभा में परिसीमन बिल जैसे बड़े कानूनों को दो-तिहाई बहुमत से पास कराने के लिए सांसदों की अवैध खरीद-फरोख्त कर रही है।
अभिषेक बनर्जी पर फूटा ठीकरा: बंगाल में ममता बनर्जी ने भी बीजेपी पर बगावत भड़काने का आरोप लगाया। हालांकि, TMC के बागी गुट का कहना है कि राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की प्रशासनिक खामियों और गलतियों के कारण ही हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी को बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त (BJP- 207 सीटें, TMC- 80 सीटें) झेलनी पड़ी।
मजबूत कैडर और 'सपोर्ट सिस्टम' का फर्क
बीजेपी के पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी दल को एकजुट रखने के लिए मजबूत नेतृत्व और आंतरिक लोकतंत्र जरूरी है। बीजेपी में ऊपर से नीचे तक फीडबैक और समीक्षा की एक मजबूत व्यवस्था है। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसी संस्थाएं एक अतिरिक्त सपोर्ट सिस्टम के रूप में काम करती हैं, जो असंतोष को कभी बगावत में नहीं बदलने देतीं।
नेताओं के पार्टी छोड़ने के इतिहास पर बीजेपी ने साफ किया कि उमा भारती, बीएस येदियुरप्पा या के. अन्नामलाई जैसे नेताओं का अलग होना व्यक्तिगत कारणों से था, न कि व्यवस्थागत खामियों की वजह से, और यही कारण है कि वे सभी आज वापस पार्टी का मुख्य हिस्सा हैं।





