पटना/नई दिल्ली (4 मार्च, 2026): बिहार के राजनीतिक गलियारों में बुधवार को उस समय जबरदस्त हलचल मच गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरें तेजी से वायरल होने लगीं। पटना में जनता दल (यूनाइटेड) की एक उच्च स्तरीय बैठक और दिल्ली में भाजपा की रणनीतियों ने राज्य की भविष्य की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
JD(U) की 'क्रूशियल' मीटिंग और नए समीकरण
पटना में जदयू के शीर्ष नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही है, जिसमें संजय झा और राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) जैसे दिग्गज मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव को लेकर पार्टी बड़ी रणनीति बना रही है।
चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं राज्यसभा जा सकते हैं, जिससे बिहार की सत्ता में बड़े फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।
यदि नीतीश कुमार दिल्ली का रुख करते हैं, तो बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी सस्पेंस गहरा गया है।
पुत्र निशांत कुमार की 'सरप्राइज एंट्री' के संकेत
इस पूरी उठापटक के बीच नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने संकेत दिए हैं कि निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री का रास्ता साफ हो गया है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि निशांत कुमार को जदयू के कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है या उन्हें बिहार सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी (जैसे उपमुख्यमंत्री) दी जा सकती है। पार्टी में इस संभावित 'सन-राइज' को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है।
राज्यसभा सीटों का गणित और अन्य उम्मीदवार
बिहार की 5 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में एनडीए (NDA) के बीच सीटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है:
| पार्टी | सीट संख्या | संभावित उम्मीदवार |
|---|---|---|
| भाजपा (BJP) | 02 | नितिन नबीन (भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष) और शिवेश कुमार |
| जदयू (JD-U) | 02 | रामनाथ ठाकुर (तय) और निशांत कुमार / नीतीश कुमार (संभावित) |
| रालोमो (RLM) | 01 | उपेंद्र कुशवाहा |
नितिन नबीन की दिल्ली रवानगी: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का बिहार से राज्यसभा जाना लगभग तय है, जिसका अर्थ है कि वे जल्द ही बिहार विधानसभा से इस्तीफा देकर पूरी तरह से राष्ट्रीय राजनीति और दिल्ली पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
क्या होगा अगला कदम?
नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है, यानी अगले 24 घंटों के भीतर बिहार की राजनीति की नई तस्वीर साफ हो जाएगी। क्या नीतीश कुमार वाकई बिहार की गद्दी छोड़कर दिल्ली की राह पकड़ेंगे? या यह जदयू की कोई नई बिसात है? फिलहाल, सबकी नजरें जदयू की आधिकारिक सूची पर टिकी हैं।





