कोलकाता/नई दिल्ली:
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसदों द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बगावत पर टीएमसी की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए बागियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बागी सांसदों को 'लालची, मतलबी और गद्दार' करार देते हुए सीधे चुनौती दी है कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे अपनी सदस्यता से इस्तीफा दें और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़कर दिखाएं।
'देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं' – महुआ मोइत्रा
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) पर एक बेहद तल्ख पोस्ट साझा करते हुए बगावत करने वाले सांसदों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा:
"ये सभी सांसद 2024 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे थे। जनता का जनादेश एनडीए के लिए बिल्कुल नहीं था। पीली पैंट वाले ये सभी लालची, मतलबी और गद्दार अब बीजेपी में शामिल हो जाएं— लेकिन पहले अपनी सीटों से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें। देखते हैं आप कितने बड़े हीरो हैं।"
संसद में अलग गुट बनाने का दावा: 'असली' TMC की जंग?
ममत्ता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के संसदीय दल में यह टूट अब पूरी तरह औपचारिक रूप लेती दिख रही है। बागी धड़े की सांसद शर्मिला सरकार ने साफ किया है कि वे संसद में एक स्वतंत्र वजूद तैयार कर रहे हैं।
नया गुट: शर्मिला सरकार के मुताबिक, "हम 20 सांसद मिलकर एक अलग ग्रुप बना रहे हैं और एनडीए को अपना समर्थन देने जा रहे हैं।"
नेतृत्व: इस नए गुट में काकोली घोष दस्तीदार को 'चीफ व्हिप' (मुख्य सचेतक) और वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय को 'डिप्टी लीडर' (उपनेता) बनाया गया है।
गौरतलब है कि काकोली घोष दस्तीदार को हाल ही में टीएमसी द्वारा व्हिप के पद से हटाए जाने के बाद से ही उनके बागी सुर तेज हो गए थे।
शिवसेना की तर्ज पर विधानसभा में भी बड़ी फूट
लोकसभा में मची इस खलबली के तार पश्चिम बंगाल विधानसभा की हालिया घटनाओं से भी जुड़े हैं, जहां पार्टी पहले ही दो धड़ों में बंट चुकी है:
विधायकों की बगावत: राज्य विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है।
'असली' होने का दावा: महाराष्ट्र में शिवसेना के घटनाक्रम से सीख लेते हुए यह गुट खुद को "असली" तृणमूल कांग्रेस बता रहा है। विधायकों की नाराजगी मुख्य रूप से विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद के लिए शोभनदेब चटर्जी को चुने जाने को लेकर थी।
स्पीकर की मान्यता: विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में स्वीकार करते हुए उन्हें असेंबली में पार्टी के कमरे की चाबियां भी सौंप दी हैं।
भविष्य की राह पर सस्पेंस:
चुनाव में मिली हार के बाद पहले राज्य विधानसभा और अब देश की सबसे बड़ी पंचायत (लोकसभा) में लगी इस सेंध ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां बागी धड़ा एनडीए के साथ मिलकर नए सियासी समीकरण गढ़ रहा है, वहीं महुआ मोइत्रा जैसी वफादार नेता बागियों को नैतिक आधार पर घेरने में जुट गई हैं। अब देखना यह है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस 20 सांसदों के पत्र पर क्या कानूनी फैसला लेते हैं।





