पटना: बिहार कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए अपने तीन विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर अनुपस्थित रहने वाले इन विधायकों की वजह से महागठबंधन के प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा था।
किन विधायकों पर है एक्शन की तलवार?
अनुशासन समिति ने जिन तीन विधायकों के खिलाफ राष्ट्रीय नेतृत्व को अनुशंसा भेजी है, वे हैं:
सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा: बाल्मीकि नगर सीट से विधायक।
मनोज विश्वास: फारबिसगंज सीट से विधायक।
मनोहर प्रसाद सिंह: मनिहारी सीट से विधायक।
अनुशासन समिति का कदम और प्रक्रिया
राज्यसभा चुनाव में अनुपस्थिति के बाद इन तीनों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया था।
जवाब से असंतोष: विधायकों ने अपने जवाब में हार के लिए प्रदेश कांग्रेस की नीतियों को ही जिम्मेदार ठहराया था। समिति उनके इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुई।
आलाकमान को पत्र: पार्टी संविधान के तहत कार्रवाई के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरु को औपचारिक पत्र भेज दिया गया है। अब अंतिम फैसला दिल्ली से लिया जाएगा।
जेडीयू (JDU) के साथ बढ़ती नजदीकियां?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये बागी विधायक सत्तापक्ष के संपर्क में हैं। इसके ठोस संकेत भी मिले हैं:
अशोक चौधरी से मुलाकात: सुरेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में नीतीश सरकार के कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की थी।
पद का लाभ: मनोहर प्रसाद सिंह को बिहार विधानसभा की एक महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जिसे सत्तापक्ष की ओर से 'साधने' की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बिहार में केवल 6 सीटों पर जीत मिली थी। अब उन 6 में से 3 विधायकों (50% संख्या बल) का बागी रुख अपनाना पार्टी के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर रहा है। यदि इन विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है, तो सदन में कांग्रेस की संख्या और कम हो सकती है।
विवाद का मुख्य कारण
इन विधायकों का तर्क है कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व जमीनी हकीकत से दूर है और उनकी नीतियों की वजह से ही महागठबंधन राज्यसभा चुनाव हारा। वहीं, पार्टी का मानना है कि यह केवल दलबदल की भूमिका तैयार करने के लिए बनाए गए बहाने हैं।
राजनीतिक विश्लेषण: "नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और विधान परिषद से इस्तीफे के बीच बिहार की राजनीति में जो हलचल शुरू हुई है, उसमें कांग्रेस के ये तीन विधायक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। बागी विधायकों को सत्तापक्ष में जगह मिलना बिहार में एक नए गठबंधन के समीकरण की ओर इशारा कर रहा है।"
बिहार की राजनीति में यह 'वोटिंग का खेल' अब 'अनुशासन के दांव-पेंच' में बदल चुका है। देखना होगा कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी इन विधायकों पर क्या फैसला लेते हैं।





