लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सियासी दलबदल का खेल तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) को एक बड़ा झटका देते हुए उसके राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम सहित 30 प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इन सभी नेताओं ने ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

सुभासपा का बढ़ता कुनबा

बृहस्पतिवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने सभी नए सदस्यों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। शामिल होने वालों में न केवल सपा के नेता हैं, बल्कि बुनकर मजदूर विकास समिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण चेहरे और ग्राम प्रधान भी शामिल हैं।

प्रमुख नाम जो सुभासपा में शामिल हुए:

जावेद आलम: राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी।

शहाबुद्दीन अंसारी: राष्ट्रीय अध्यक्ष, बुनकर मजदूर विकास समिति।

खालिद सैफी: दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष।

अन्य: डॉ. मोहम्मद नाजिम अंसारी, ताजुद्दीन अंसारी, और विभिन्न जिलों (बिजनौर, लखनऊ, अमरोहा, प्रतापगढ़) के कार्यकर्ता।

'PDA' पर अरुण राजभर का तीखा प्रहार

सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान अरुण राजभर ने अखिलेश यादव और उनकी रणनीति पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सपा के बहुचर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर तंज कसते हुए उसकी नई व्याख्या कर दी।

"सपा का पीडीए (PDA) केवल राजनीतिक जरूरत के हिसाब से बदलता है। असल में पीडीए का मतलब है— 'पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश' (Party of Dimple and अखिलेश)।" — अरुण राजभर

राजभर ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी केवल परिवारवाद तक सीमित है और बुनकर व अल्पसंख्यक समाज के असली हितैषी अब सुभासपा के साथ जुड़ रहे हैं।

संगठन विस्तार पर जोर

सुभासपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपना संगठन विस्तार अभियान तेज कर दिया है। दिल्ली, गाजियाबाद, शाहदरा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए इन नेताओं के शामिल होने से पार्टी को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश, दोनों क्षेत्रों में मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विशेष रूप से बुनकर समाज के बड़े चेहरों का सुभासपा में आना सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है।

चुनावों से ठीक पहले इस तरह का पलायन अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है, जबकि सुभासपा इसे अपनी 'सस्टेनेबल पॉलिटिक्स' की जीत मान रही है।