मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय या फिर शरद पवार गुट की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में अलग से एंट्री को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंथन का दौर जारी है। सूत्रों का दावा है कि शरद पवार की पार्टी का NDA में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन इसके 'क्रोनोलॉजी और फॉर्मूले' पर परदे के पीछे से बातचीत का सिलसिला जारी है।
विलय की राह में 'नेतृत्व की जंग' और सुनेत्रा पवार की शर्तें
सूत्रों के मुताबिक, दोनों गुटों के एक होने में सबसे बड़ी अड़चन नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण को लेकर है। अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनका खेमा फिलहाल सुप्रिया सुले के साथ किसी भी जल्दबाजी में पैचअप या विलय के पक्ष में नहीं है।
कमान खोने का डर: सुनेत्रा पवार को आशंका है कि यदि शरद पवार गुट का राकांपा में विलय होता है, तो पार्टी का नियंत्रण धीरे-धीरे पूरी तरह सुप्रिया सुले के हाथों में चला जाएगा।
पावर सेंटर पर दावा: सुनेत्रा पवार की इच्छा है कि महाराष्ट्र में नेतृत्व की भूमिका के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन की कमान उनके पास रहे। वे नियुक्तियों, पदाधिकारियों के चयन और राज्य सरकार में कैबिनेट फेरबदल की स्थिति में वित्त मंत्रालय जैसे प्रमुख विभागों पर अंतिम निर्णय का अधिकार अपने पास रखना चाहती हैं। इन शर्तों पर सहमति न बनने से बातचीत में गतिरोध है।
अजीत पवार गुट में दो फाड़: इस बीच अजीत पवार की राकांपा के भीतर भी दो धड़े नजर आ रहे हैं। एक तरफ सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का गुट सक्रिय है, तो दूसरी तरफ सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल का खेमा अलग रणनीति पर काम कर रहा है।
नया सियासी फॉर्मूला: परिसीमन (Delimitation) विधेयक पर टिकी नज़रें
विलय में आ रही अड़चनों को देखते हुए अब एक दूसरे विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
संभावित रणनीति: यदि संसद में परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक आता है, तो शरद पवार की पार्टी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसका समर्थन कर सकती है। इसके बाद, संसद सत्र समाप्त होते ही शरद पवार की राकांपा को एक अलग स्वतंत्र सहयोगी दल के रूप में NDA का हिस्सा बनाया जा सकता है। बाद में स्थितियां सामान्य होने पर दोनों गुटों के विलय या समझौते की कोशिश की जाएगी।
इस फॉर्मूले को बल देते हुए राकांपा (शरद पवार) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा, "यदि परिसीमन विधेयक महिला आरक्षण और उनके हितों को ध्यान में रखकर लाया जाता है और इसमें कोई राजनीतिक स्वार्थ नहीं होता, तो हमारी पार्टी शर्तों के आधार पर इस पर सकारात्मक विचार कर सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय सांसद सुप्रिया सुले पार्टी के भीतर सामूहिक चर्चा के बाद ही लेंगी।"
'अजीत दादा होते तो शायद विलय हो जाता' — सुप्रिया सुले
संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए शरद पवार गुट की वर्किंग प्रेसिडेंट सुप्रिया सुले और अजीत पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, दोनों ने ही फिलहाल किसी भी तुरंत विलय की बात से इनकार किया है। सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया:
"जब हमारे नेता अजीत दादा जीवित थे, तब विलीनीकरण (विलय) को लेकर एक चर्चा जरूर हुई थी। शायद अगर वे 15 दिन और रहते तो विलय हो भी जाता। लेकिन आज दादा के निधन के बाद विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है।"
शिवसेना (शिंदे गुट) की प्रतिक्रिया: 'इकट्ठा नहीं, अलग-अलग आ सकते हैं साथ'
महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री और शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने इस पूरे घटनाक्रम पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों गुटों के एक साथ आने की संभावना को खारिज करते हुए कहा:
| संजय शिरसाट का राजनीतिक आकलन |
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| "फिलहाल दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस इकट्ठा नहीं आएंगे। दोनों पक्षों की शर्तें एक-दूसरे को मंजूर नहीं हैं। इसलिए इकट्ठा होकर विलय संभव नहीं लग रहा है।" |
| "हाँ, यह जरूर मुमकिन है कि शरद पवार की राकांपा अपने स्वतंत्र अस्तित्व के साथ अलग से एनडीए (NDA) में शामिल हो जाए। इस पर वर्कआउट किया जा रहा है।" |
निष्कर्ष: महाराष्ट्र की राजनीति में यह साफ है कि अंदरूनी खींचतान के बावजूद शरद पवार गुट की एनडीए से नजदीकियां बढ़ रही हैं। अब देखना यह होगा कि यह जुड़ाव परिसीमन बिल के बहाने होता है या फिर विधानसभा चुनावों से पहले किसी नए समीकरण के रूप में सामने आता है।





