कोलकाता।

पश्चिम बंगाल में सत्ता के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही बगावत की चिंगारी अब एक बड़े विस्फोट में बदल गई है। कोलकाता नगर निगम (KMC) के ड्रेनेज विभाग के मेयर परिषद सदस्य (MMIC) और पार्टी के वरिष्ठ नेता तारक सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले 20 वर्षों से पार्षद और तृणमूल के जन्मकाल से जुड़े तारक सिंह के इस कदम ने न सिर्फ नगर निगम, बल्कि राज्य की राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है।

नेतृत्व पर सीधा वार: "विरोध अभिषेक से नहीं, सीधे ममता बनर्जी से है"

इस्तीफा देने के बाद तारक सिंह के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनका विरोध केवल अभिषेक बनर्जी से नहीं, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है, जिन्होंने अभिषेक को नेता बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा हो रही है। कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा:

"जब पार्टी का नेतृत्व अपने ही कार्यकर्ताओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रहा है, तो ऐसे में चुप बैठना मुमकिन नहीं। जो नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं हो सकता, वह ज्यादा से ज्यादा मुझे पार्टी से निकाल देगा, मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।"

बैठकों से दूरी और बंद कमरों की सियासत पर सवाल

गौरतलब है कि तारक सिंह ने हाल ही में कालीघाट में हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से भी दूरी बना ली थी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "वहां जाकर मैं क्या करूंगा? जब नगर निगम में मेयर परिषद (MMIC) की बातें ही लागू नहीं हो रहीं, तो उस बंद कमरे में बैठकर मीटिंग करने का क्या फायदा?"

कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम भी कठघरे में

इस्तीफा सौंपने के बाद तारक सिंह ने कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। हालांकि, उन्होंने कोलकाता की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे भले ही अब पद पर नहीं हैं, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक और जनप्रतिनिधि के रूप में कोलकाता को जलजमाव (Waterlogging) की समस्या से बचाने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।

टीएमसी के लिए खतरे की घंटी?

बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर और बाहर बगावती सुर थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इंटरनेट मीडिया से लेकर निगम के गलियारों तक, नेतृत्व को खुली चुनौती दी जा रही है। तारक सिंह से पहले केएमसी के दो बोरो चेयरमैन भी इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में पुराने और वफादार सिपाही का इस तरह बागी होना ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए आने वाले दिनों में बड़ी संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर सकता है।