कोलकाता/नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इतिहास की सबसे बड़ी बगावत के बाद अब जुबानी जंग कानूनी अखाड़े में तब्दील होने जा रही है। पाला बदलकर एनडीए (NDA) खेमे को समर्थन देने वाले TMC के 20 बागी सांसद अब फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, महुआ मोइत्रा द्वारा बागी सांसदों पर '40-40 करोड़ रुपये में बिकने' का संगीन आरोप लगाए जाने के बाद बागी गुट ने एकजुट होकर उनके खिलाफ मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर करने का फैसला किया है। सांसदों ने महुआ के इस दावे को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और उनकी छवि को धूमिल करने वाला बताया है।
महुआ का वो आरोप, जिससे भड़की बगावत की आग
दरअसल, यह पूरा विवाद महुआ मोइत्रा के एक बेहद आक्रामक और तंजिया सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ। महुआ ने पैसों के लेन-देन का गणित समझाते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया था:
करोड़ों का खेल: महुआ का दावा था कि TMC छोड़ने वाले 20 सांसदों को 4 करोड़ रुपये एडवांस दिए गए हैं और बाकी के 36 करोड़ रुपये अगले 36 महीनों तक हर महीने एक-एक करोड़ रुपये के रूप में दिए जाएंगे।
संजय राउत के बयान पर पलटवार: महुआ का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस दावे के जवाब में आया था, जिसमें राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये ऑफर किए जा रहे हैं।
महुआ मोइत्रा का वो विवादित पोस्ट (17 जून): "सिर्फ़ 15 करोड़ रुपये? इतने सस्ते में क्यों जा रहे हैं? यकीन मानिए, हमें तो 4 करोड़ रुपये एडवांस में मिले और अगले 36 महीनों तक हर महीने 1 करोड़ रुपये मिलेंगे... शहद के साथ पैसा भी।"
TMC में इतिहास की सबसे बड़ी टूट: 28 में से 20 सांसद अलग
यह सियासी घमासान तब सामने आया जब लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस दोफाड़ हो गई। पार्टी की मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अपना एक अलग समूह बना लिया।
स्पीकर को पत्र: बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा पत्र सौंपकर भाजपा (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का एलान कर दिया।
कानूनी दांवपेच (NCPI में विलय): दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अपनी संसद सदस्यता रद्द होने से बचाने के लिए इन सभी 20 सांसदों ने त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में अपना तकनीकी रूप से विलय कर लिया। फिलहाल यह गुट सीधे बीजेपी में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार को बाहर से मजबूत समर्थन दे रहा है।
ममता को झटका: साल 1998 में TMC के गठन के बाद से इसे ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इस टूट के बाद लोकसभा में टीएमसी की ताकत घटकर महज 8 सांसदों की रह गई है।
ममता के साथ चट्टान की तरह खड़ी महुआ, यूसुफ पठान को भी घेरा
इस भीषण राजनीतिक संकट के बीच भी महुआ मोइत्रा पूरी वफादारी के साथ ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं। उन्होंने बागी नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्हें 'बेकार नेता' करार दिया, जो अब तक सिर्फ ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव जीतते आ रहे थे।
महुआ ने बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को भी आड़े हाथों लिया, जिन पर बागी खेमे को मूक समर्थन देने का आरोप लगा है। महुआ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समन पर पठान द्वारा दिए गए जवाब पर तीखे सवाल उठाए और तंज कसते हुए कहा कि "पठान को राजनीति के पिच पर भी अपने क्रिकेट करियर जैसी ही हिम्मत और दिलेरी दिखानी चाहिए, न कि दबाव में झुकना चाहिए।"





