पटना:
बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी, पूर्व मंत्री और आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम ने सोमवार (8 जून, 2026) को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। पटना में आयोजित एक बेहद भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवचंद्र राम अपने आंसू नहीं रोक पाए और कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए दशकों तक खून-पसीना बहाने के बावजूद उनके साथ घोर नाइंसाफी और धोखा हुआ है।
सुनील सिंह के नामांकन के बाद भड़का गुस्सा
आरजेडी के भीतर मचे इस घमासान की मुख्य वजह विधान परिषद चुनाव का टिकट कटना है। दरअसल, आरजेडी ने इस सीट पर सुनील सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने सोमवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। सुनील सिंह के नामांकन के तुरंत बाद शिवचंद्र राम का यह आत्मघाती राजनीतिक कदम सामने आया।
लालू-तेजस्वी को बधाई, लेकिन दर्द भी छलका
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद भावुक दिख रहे शिवचंद्र राम ने मीडिया से बात करते हुए अपने 36 साल के सियासी सफर को याद किया। उन्होंने कहा:
"मैं साल 1990 से आरजेडी के साथ मजबूती से खड़ा रहा हूँ। पार्टी में रहकर मैंने हमेशा आलाकमान की नीतियों और हर छोटे-बड़े फरमान का पूरी निष्ठा से पालन किया। आरजेडी ने मुझे पहले मान-सम्मान दिया, इसके लिए मैं लालू यादव और तेजस्वी यादव को बधाई देता हूँ, लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से मैंने अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दिन बिताए हैं..."
यह कहते-कहते पूर्व मंत्री का गला भर आया और वे रो पड़े।
समाज के अपमान का लगाया आरोप, छोड़े सारे पद
शिवचंद्र राम ने टिकट न मिलने को केवल अपने साथ नहीं, बल्कि अपने पूरे समाज के साथ धोखा बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में अपनी बात रखी:
समाज में आक्रोश: "हमारे साथ बड़ी नाइंसाफी हुई है। पिछले तीन दिनों से मेरे समाज के लोग पटना आकर होटलों में ठहरे हुए हैं और इस फैसले से वे बेहद आहत हैं।"
पदों का त्याग: "मैं आज आरजेडी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य सभी सांगठनिक पदों से अपना इस्तीफा दे रहा हूँ।"
"हम क्या डरेंगे..." – भविष्य की राजनीति पर सस्पेंस
जब मीडिया कर्मियों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे किसी के दबाव में इस्तीफे की असली वजह खुलकर नहीं बता रहे हैं, तो उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, "हम क्या किसी से डरेंगे..." हालांकि, उन्होंने अपने भविष्य के सियासी कदम को लेकर पत्ते नहीं खोले और सिर्फ इतना कहा कि आगे की रणनीति की जानकारी वे जल्द ही साझा करेंगे।
लालू परिवार के संकटमोचक माने जाने वाले शिवचंद्र राम का चुनाव के ठीक पहले पार्टी छोड़ना आरजेडी के दलित विंग और सांगठनिक ढांचे के लिए बिहार की राजनीति में एक बड़ा डैमेज माना जा रहा है।





