उत्तर 24 परगना | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर उत्तर 24 परगना के टेंटुलिया में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार किया है। ममता बनर्जी ने भाजपा की तुलना 'सांप' से करते हुए कहा कि भाजपा पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता।

असम चुनाव में 'बाहरी' लोगों का आरोप

मुख्यमंत्री ने असम में हाल ही में संपन्न हुए मतदान (9 अप्रैल) का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा को स्थानीय जनता पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्होंने चुनाव प्रभावित करने के लिए बाहर से लोग बुलाए। ममता ने दावा किया:

"भाजपा ने असम चुनाव जीतने के लिए उत्तर प्रदेश से 50,000 लोगों को ट्रेनों में भरकर वहां भेजा। उन्हें डर था कि स्थानीय लोग उन्हें वोट नहीं देंगे।"

"एजेंसियों को खरीद चुकी है भाजपा"

केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में अब कोई भी संवैधानिक संस्था निष्पक्ष नहीं रह गई है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि केसरिया पार्टी ने सभी एजेंसियों को 'खरीद' लिया है और उनका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा, "एक सांप पर तो आप भरोसा कर सकते हैं, लेकिन भाजपा पर कभी नहीं।"

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने पर जताई चिंता

ममता बनर्जी ने रैली में मतदाता सूची (Voter List) में हुए बदलावों और विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया:

बंगाल का आंकड़ा: पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इनमें से 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।

असम एनआरसी (NRC) का उदाहरण: उन्होंने याद दिलाया कि असम एनआरसी में भी 19 लाख लोगों के नाम काटे गए थे, जिनमें 13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम थे।

उन्होंने इसे भाजपा की सोची-समझी रणनीति बताते हुए लोगों से सतर्क रहने और अपने मताधिकार की रक्षा करने की अपील की।

सियासी पारा चढ़ा

असम में कल ही सभी 126 सीटों पर मतदान समाप्त हुआ है और अब बंगाल में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है। ममता बनर्जी के इस ताजा बयान ने राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच चल रहे 'जुबानी जंग' को और तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कड़ा रुख आगामी चरणों के मतदान में ध्रुवीकरण और स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे को और हवा देगा।