नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में हुई 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की हालिया बैठक से देश की सियासत के नए और बेहद दिलचस्प समीकरण उभरकर सामने आ रहे हैं। इस बैठक के जो संकेत मिल रहे हैं, वे साफ इशारा कर रहे हैं कि आगामी समय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विपक्षी गठबंधन में कोई बहुत अहम और केंद्रीय भूमिका मिल सकती है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व—सोनिया गांधी और राहुल गांधी—के बदले रुख ने इन कयासों को और हवा दे दी है।
सोनिया-ममता की 'गर्मजोशी' बनी टर्निंग पॉइंट
बैठक शुरू होने से ठीक पहले एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जो पूरी बैठक के राजनीतिक घटनाक्रम पर भारी पड़ गया। तय समय से कुछ मिनट पहले बैठक स्थल पर पहुंचीं कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी का जिस आत्मीयता और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।
ममता के पहुंचते ही सोनिया गांधी ने आगे बढ़कर उन्हें गले लगाया (जादू की झप्पी दी) और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 10 मिनट तक गहन चर्चा हुई। बैठक में मौजूद नेताओं के अनुसार, दोनों के बीच हुई यह सहज और आत्मीय बातचीत केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं थी, बल्कि यह बदलते रिश्तों की नई इबारत थी।
विपक्षी राजनीति में उभर रहे नए समीकरण
पिछले कुछ समय से विपक्षी खेमे में ममता बनर्जी की राष्ट्रीय भूमिका को लेकर सस्पेंस बना हुआ था, लेकिन इस बैठक ने काफी हद तक तस्वीरें साफ कर दी हैं:
पुरानी बातें भूलने की वकालत: बैठक में ममता बनर्जी सबसे सक्रिय नेताओं में शुमार रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि सभी दलों को पुराने मतभेदों और कड़वाहट को भुलाकर एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा।
ममता के पक्ष में क्षेत्रीय दल: सूत्रों का दावा है कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी मोर्चे को मजबूत करने की कवायद के बीच गठबंधन के कई बड़े क्षेत्रीय दल ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी और सक्रिय भूमिका में देखने के पक्षधर हैं।
कांग्रेस का 'बदला अवतार': क्षेत्रीय दलों को सम्मान
इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता कांग्रेस के रणनीतिक रवैये में आया बड़ा बदलाव रही, जिसे वहां मौजूद कई नेताओं ने भी महसूस किया:
| कांग्रेस की पुरानी रणनीति | दिल्ली बैठक में नया रुख |
|---|---|
| पहले केवल औपचारिक निमंत्रण भेजने और नेतृत्व अपने हाथ में रखने तक सीमित रहने का आरोप लगता था। | इस बार तैयारियों के दौरान ही छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा गया। उनके सुझावों को तरजीह दी गई। |
बदली सोच: कांग्रेस के भीतर अब यह समझ पूरी तरह मजबूत हो चुकी है कि भाजपा जैसी मजबूत ताकत के खिलाफ लड़ाई में क्षेत्रीय क्षत्रपों को अधिक सम्मान और राजनीतिक जमीन (स्पेस) दिए बिना व्यापक विपक्षी एकता का सपना साकार नहीं हो सकता।
राहुल गांधी बोले- 'विशेष महत्व की नेता हैं ममता'
बैठक के दौरान राहुल गांधी का रुख भी खासा चर्चा का विषय बना रहा। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने ममता बनर्जी को 'विशेष महत्व की नेता' बताते हुए रेखांकित किया कि बंगाल की राजनीति में उनका जो विशाल जनाधार और कद है, उसे देखते हुए विपक्षी दलों के बीच एक बेहतर और मजबूत तालमेल होना अनिवार्य है।
नतीजा: सकारात्मक रही बातचीत
वामपंथी दलों (CPI) समेत बैठक में मौजूद कई अन्य नेताओं ने माना कि इस बार की बातचीत पहले के मुकाबले कहीं अधिक सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल में हुई। प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर आम सहमति बनने से विपक्षी एकता को एक नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा मिलती दिख रही है।





